गुमला: केंद्र और राज्य सरकार की अल्पसंख्यकों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के कार्यन्वयन में कल्याण और शिक्षा विभाग के पदाधिकारी कोताही बरत रहे है। जिस कारण योजनाओं का लाभ अल्पसंख्यकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। गुमला के उपायुक्त व संबंधित विभाग के पदाधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि कमी को जल्द पूरा किया जाएगा। यदि हित के काम प्रारंभ नहीं होते है, तो आयोग सख्ती दिखाएगा और अफसर चिन्हित किए जाएंगे। उक्त बातें झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के वरीय उपाध्यक्ष शमशेर आलम ने सर्किट हाउस में पत्रकार सम्मेलन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि गुमला जिले में उर्दू शिक्षकों के 28 पद रिक्त है। जबकि 12 कार्यरत है। अभी सहायक आचार्यो की बहाली में जो नियुक्तियां होंगी। उनके जरिए उर्दू शिक्षकों की भी बहाली की जाएगी। उर्दू एकेडमी के सवाल पर कहा कि सिर्फ उर्दू नहीं बल्कि बंग्ला सहित अन्य एकेडमी की मांग पर सरकार चिंतन कर रही है। जल्द ही इसके परिणाम नजर आएंगे। आलम ने वर्ष 19-20 की एमएसडीपी अब पीएम जन विकास कार्यक्रम के निमित पेयजल की योजना पूर्ण नहीं होने पर नाराजगी जताई। कहा कि पीएचईडी विभाग ने इसपर अपनी जिम्मेवारी नहीं निभाई है। उन्होंने कहा कि सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए राशि देती है, तो उसका उपयोग करें। सरकार अपने स्तर से हर प्रयास कर रही है। किंतु उनका सही तरीके से कार्यन्वयन करना जिला प्रशासन की जवाबदेही है। मौके पर आयोग के सदस्य वारीश कुरैशी, डीपीआरओ ललन कुमार, एपीआरओ अलीना दास व दीवाकर साहू सहित अन्य लोग मौजूद थे।




