
पद्मासन ध्यान और एकाग्रता के लिए प्रमुख योगासन माना जाता है। विद्यार्थियों के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, क्योंकि पढ़ाई में एकाग्रता, मानसिक स्थिरता, स्मरण शक्ति और तनाव नियंत्रण महत्वपूर्ण होते हैं।
विद्यार्थियों के अध्ययन में पद्मासन का वैज्ञानिक संबंध
पद्मासन स्वयं सीधे स्मरण शक्ति या बुद्धि बढ़ाने वाला आसन नहीं है, लेकिन यह शरीर को स्थिर और मन को शांत करने में सहायक होता है। जब इसे प्राणायाम और ध्यान के साथ किया जाता है, तो अध्ययन के लिए आवश्यक एकाग्रता, मानसिक स्थिरता और तनाव-नियंत्रण में सहायता मिल सकती है।
* एकाग्रता पर प्रभाव
पद्मासन में शरीर स्थिर रहता है और रीढ़ सीधी रखी जाती है। इस स्थिरता के साथ ध्यान करने से ध्यान नियंत्रण और एकाग्रता का अभ्यास होता है।
* तनाव और कोर्टिसोल
परीक्षा और पढ़ाई का अत्यधिक तनाव हाइपोथैलेमस–पिट्यूटरी–एड्रीनल अक्ष को सक्रिय कर सकता है, जिससे कोर्टिसोल बढ़ सकता है। लंबे समय तक अत्यधिक तनाव ध्यान, सीखने और कार्यशील स्मृति को प्रभावित कर सकता है।
पद्मासन में शांत एवं धीमी श्वास का अभ्यास विश्राम प्रतिक्रिया को बढ़ावा दे सकता है।
* कार्यशील स्मृति
कार्यशील स्मृति वह क्षमता है जिसके द्वारा विद्यार्थी किसी जानकारी को थोड़े समय तक मन में रखकर उसका उपयोग करता है। योग एवं ध्यान आधारित अभ्यासों पर हुए अध्ययनों में कार्यशील स्मृति और कार्यकारी संज्ञानात्मक क्षमताओं में सकारात्मक प्रभाव देखे गए हैं।
पद्मासन ध्यान के लिए स्थिर आधार प्रदान करता है, इसलिए यह ऐसे अभ्यासों का उपयोगी हिस्सा हो सकता है।
* पद्मासन सैक्रल और कॉक्सीजियल नसों में खून का बहाव बढ़ाकर उन्हें मज़बूत बनाता है। इसमें पैरों की तरफ़ खून का बहाव कम हो जाता है और पेट के हिस्से की तरफ़ ज़्यादा खून पहुँचता है। यह उन लोगों के लिए फ़ायदेमंद है जिन्हें इमोशनल और नर्वस से जुड़ी परेशानियाँ हैं। हालाँकि, जिन लोगों को सायटिका या सैक्रल इन्फ़ेक्शन है, उन्हें तब तक पद्मासन नहीं करना चाहिए जब तक उनकी समस्या ठीक न हो जाए।
पद्मासन करने की विधि
• शांत और स्वच्छ स्थान पर योग मैट बिछाकर बैठ जाएँ।
• दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा कर दण्डासन में बैठें।
• दाहिने पैर को मोड़कर उसके पंजे को बाईं जांघ के ऊपर रखें। एड़ी नाभि के पास रहे।
• अब बाएँ पैर को मोड़कर उसका पंजा दाईं जांघ के ऊपर रखें।
• दोनों घुटनों को धीरे-धीरे जमीन की ओर आने दें। जोर लगाकर घुटनों को नीचे न दबाएँ।
• रीढ़, गर्दन और सिर को सीधा रखें।
• दोनों हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा या चिन मुद्रा में रखें।
• आँखें बंद करें और चेहरे तथा कंधों को ढीला रखें।
• धीरे-धीरे और सहज रूप से श्वास लें तथा छोड़ें।
प्रारंभ में 2–5 मिनट बैठें। अभ्यास बढ़ने पर 10–15 मिनट तक किया जा सकता है।
आसन से निकलते समय पहले पैरों को धीरे-धीरे खोलें और उन्हें सामने सीधा कर लें।
पद्मासन की सावधानियाँ
• घुटने, कूल्हे या टखने में दर्द होने पर पद्मासन न करें।
• घुटनों को हाथ से दबाकर जमीन पर लगाने का प्रयास न करें।
• यदि कूल्हों में पर्याप्त लचीलापन नहीं है तो पैर को जबरदस्ती जांघ के ऊपर न रखें।
• शुरुआत में पद्मासन कठिन लगे तो सुखासन या अर्ध-पद्मासन करें।
• लंबे समय तक बैठने पर पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट हो तो आसन खोल दें।
• दर्द और सामान्य खिंचाव में अंतर समझें—दर्द होने पर तुरंत आसन से बाहर आएँ।
• भोजन के तुरंत बाद पद्मासन न करें; सामान्यतः भोजन के लगभग 2–3 घंटे बाद योग करना बेहतर होता है।
• शुरुआत में किसी योग प्रशिक्षक की देखरेख में सही तकनीक सीखना उपयोगी है।
जगदीश सिह
योगा इन्स्ट्रक्टर
आयुष्मान आरोग्य मन्दिर, नेशनल हेल्थ मिशन, स्वास्थ्य विभाग, झारखण्ड सरकार
Email : jagdishranchi@gmail.com




