योग मित्र मंडल, रांची, बिहार स्कूल ऑफ योग, मुंगेर, बिहार से संबद्ध, द्वारा “दिनचर्या और आहार” विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने ऑनलाइन जुड़कर विशेषज्ञों के विचार सुने।
परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में विप्र महाविद्यालय, रायपुर की सहायक प्रोफेसर डॉ. रंजना मिश्रा (पीएचडी, योग) एवं शासकीय आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, रायपुर की डॉ. प्रज्ञा मिश्रा (एम.डी., आयुर्वेद) ने दिनचर्या, आहार और स्वस्थ जीवनशैली के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के प्रारंभ में योग मित्र मंडल, रांची की डॉ. परिणीता सिंह ने परिचर्चा की रूपरेखा एवं उद्देश्य की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम की शुरुआत शांति पाठ से हुई। योग मित्र मंडल के अध्यक्ष रामकुमार कटारिया ने योग मित्र मंडल एवं बिहार स्कूल ऑफ योग के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बिहार स्कूल ऑफ योग ने पूरी दुनिया में योग की अलख जगाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
पांचों इंद्रियों से ग्रहण किया गया विषय भी है आहार
डॉ. रंजना मिश्रा ने आहार की व्यापक अवधारणा को समझाते हुए कहा कि केवल मुख से ग्रहण किए जाने वाले भोजन को ही आहार नहीं कहा जाता, बल्कि पांचों इंद्रियों के माध्यम से हम जो कुछ ग्रहण करते हैं, वह भी आहार का ही हिस्सा है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को ऋतु के अनुसार आहार लेना चाहिए।
शाकाहार और मांसाहार के संदर्भ में उन्होंने शाकाहारी भोजन को पाचन तंत्र के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि सात्त्विक, शुद्ध एवं संतुलित आहार को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए।
दिनचर्या पर प्रकाश डालते हुए डॉ. रंजना ने कहा कि दिन की शुरुआत ईश्वर वंदना से करनी चाहिए। इसके बाद दैनिक क्रियाओं का पालन करते हुए नियमित रूप से टहलना एवं शारीरिक गतिविधियां करना आवश्यक है। उन्होंने शाम के बाद भोजन करने से बचने की सलाह भी दी।
“जैसा खाया अन्न, वैसा पाया मन”
डॉ. प्रज्ञा मिश्रा ने आहार और मन के संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रसिद्ध कहावत “जैसा खाया अन्न, वैसा पाया मन” आहार और मानसिक स्थिति के गहरे संबंध को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि शरीर का मेटाबॉलिज्म जितना बेहतर होगा, पाचन क्रिया भी उतनी ही अच्छी होगी।
उन्होंने कहा कि केवल अच्छा आहार लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वस्थ आहार के साथ सही जीवनशैली भी जरूरी है। यदि आहार अच्छा है, लेकिन जीवनशैली असंतुलित है, तो शरीर पूरी तरह स्वस्थ नहीं रह सकता। उन्होंने स्नान से पूर्व तेल मालिश को भी दिनचर्या में शामिल करने पर जोर दिया।
ऋतुचर्या की चर्चा करते हुए डॉ. प्रज्ञा ने बताया कि सामान्यतः गर्मी के मौसम में दिन में सोना उचित माना जाता है। वर्षा ऋतु में पाचनाग्नि मंद होने के कारण उन्होंने हल्का, ताजा एवं गर्म भोजन लेने की सलाह दी।
उन्होंने विरुद्ध आहार से बचने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भोजन के ऐसे संयोजन, जो पाचन के लिए अनुकूल न हों, शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कुछ खाद्य पदार्थों के अनुचित संयोजन से बचने की सलाह दी और बताया कि विरुद्ध आहार का प्रभाव त्वचा संबंधी समस्याओं के रूप में भी दिखाई दे सकता है।
मोबाइल स्क्रीन टाइम और पाचन का संबंध
डॉ. प्रज्ञा मिश्रा ने आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते मोबाइल स्क्रीन टाइम को भी स्वास्थ्य से जोड़ते हुए प्रतिभागियों को स्क्रीन टाइम कम करने तथा संतुलित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए दिनचर्या में योग को शामिल करना आवश्यक है। नियमित योगाभ्यास से शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के साथ मानसिक परेशानियों को कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
कार्यक्रम में रांची एवं झारखंड के अलावा देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिभागी ऑनलाइन जुड़े। परिचर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के बीच स्वस्थ आहार, संतुलित दिनचर्या और योग आधारित जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया।
परिचर्चा का संचालन प्रीति गुप्ता के द्वारा किया गया.




