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आधुनिक समाज में आदिवासी ज्ञान की प्रासंगिकता” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

राची, झारखण्ड  | अप्रैल |  11, 2025 ::

संत जेवियर्स कॉलेज राँची के ट्राइबल रिसर्च सेंटर के तत्वाधान में “आधुनिक समाज में आदिवासी ज्ञान की प्रासंगिकता” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित किया गया है| संगोष्ठी का उद्देश्य आदिवासी ज्ञान के प्रति जागरूकता एवं उसके संरक्षण हेतु आदिवासीयत को प्रोत्साहित करना था|

सेमिनार का उद्घाटन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर रोबर्ट प्रदीप कुजूर, एसजे, रेक्टर डॉ. सुधीर मिंज, एसजे, डॉ. अजय मिंज, एसजे, डॉ. फादर फ्लोरेंस पूर्ती, एसजे व आमंत्रित अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया| सत्र के पहले दिन मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित सेवानिवृत प्राध्यापक डॉ. सिकरादास तिर्की ने अपने वक्तव्य में आधुनिक समय में आदिवासी ज्ञान की उपयोगिता पर प्रकाश डाला| कॉलेज के रेक्टर डॉ. सुधीर मिंज, एसजे ने भी विषय पर बोलते हुए बताया कि जनजातीय समाज में व्याप्त लोकोक्तियाँ, कथाएं, गीत ज्ञान के खान हैं जो कि समाज को नई दिशा देता है| कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर रोबर्ट प्रदीप कुजूर, एसजे ने भी जनजातीय समाज में प्राकृतिक संकेतों को समझने की क्षमता है और वे उसी के अनुसार कार्य करते हैं| सत्र में देश के विभिन्न भागों से 100 से अधिक विद्वानों व शोधार्थियों ने हिस्सा लिया|
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में आदिवासी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. फ्लोरेंस पूर्ती, एसजे व अन्य सदस्यों डॉ. जॉन कंडुलना, डॉ. प्रदीप कुमार बोदरा, डॉ. के. सी. टुडू, डॉ. लालिमा कुजूर, डॉ. तारकेलेड कुल्लू, प्रेमा तिग्गा, विशाल होरो का अहम योगदान रहा|

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