राची, झारखण्ड | अक्टूबर | 06, 2022 :: चौधरी बगान, हरमू रोड ब्रह्माकुमारी संस्थान में कार्यक्रम मेडीटेशन अनुभूति से मनुष्य को अनेक प्रकार की शक्तियाँ प्राप्त होती है जिनसे सहज ही तनाव से मुक्ति पाई जा सकती है। इन शक्तियों के द्वारा मनुष्य रोग, शोक, चिंता व सर्व परेशानियों को जीत लेता है। ये उद्गार ब्रह्माकुमारी संस्थान, चौधरी बगान, हरमू रोड में तनाव मुक्ति मेडीटेशन अनुभूति राजयोग कार्यक्रम का दीप जलाकर उठा-
करते हुए रांची के पूर्व मेयर उदय प्रताप सिंह ने अभिव्यक्त किए। उन्होंन सहनशीलता ही हर समस्या का समाधान है। तनाव को अलविदा करके परिवार की दरारें दूर कर दें तो सुखी परिवार बन जाए। अशांति का कारण ईश्वरनुभूति का अभाव है। ब्रह्माकुमारी संस्थान में ईश्वर का सान्निध्य मिलने से अकेलापन आइजोलेशन दूर होता है तथा सर्वशक्तिमान से कनेक्शन कम्यूनिकेशन जूट मेडीटेशन यात्रा का मार्ग प्रशस्त होता कार्यक्रम में ग्रामीण बैंक के सहायक महाप्रबंधक अभय ने कहा अनेक बीमारियों का कारण तनाव है। आज के आदमी ने भौतिकवादी युग में स्वस्थ जीवनशैली को दरकिनार कर दिया है। वह नकारात्मक चीजों के वशीभूत हो गया है। सर्वोच्च दिल वाला परमात्मा ही है उसको दिल देने से सभी बीनारियाँ दूर हो जाती है। ब्रह्माकुमारी संस्थान के
मेडीटेशन से मानसिक एकाग्रता, आत्म विश्वास व सद्गुणों से युक्त व्यक्तित्व का विकास होता है।
कार्यक्रम में मृत्युंजय, व्यवसायी व समाजसेवी ने मेडीटेशन अनुभूति शिविर में कहा व्यर्थ चिंतन से दुख क्षोभ और तनाव पैदा होता है। मानव यदि संकीर्ण विचारों से उपर उठकर दूसरों के कार्य व्यवहार को साक्षी दृष्टि से देखे तो किसी से गिला शिकवा न रहे। प्रियजनों से झगड़ा, भविष्य की दुश्चिंता बदनामी का भय आदि मानसिक तनाव के उत्पादन है जिससे आदमी विषादग्रस्त हो जाता है। शांति, चैन, सुख की खोज में भटकते आदमी को परमात्म स्मृति की छत्रछाया ही सही रास्ता प्रदान करेगी। अब मेडीटेशन अनुभूति की तीब्र ज्वाला में तनाव को भस्म कर देना चाहिए। ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा दुखों को ज्ञान के सागर में डाल अपने हृदय को हल्का रखना चाहिए। आदमी मन की बातें न व्यक्त करके दर्द भरा जीवन जी रहा है। दौड़भाग आपाधापी में इन्सान ने अपनी सहजता को खो दिया है। मानसिक स्थिरता व एकाग्रता हेतु राजयोगी जीवन शैली लाभदायक है जो चौधरीबगान, हरमू रोड, विशाल मेगामार्ट के पास ब्रह्माकुमारी संस्थान में प्रतिदिन सिखाई जाती है। आज सारा संसार सच्चे योगियों के प्रत्यक्ष होने की वाट जोह रहा है क्योंकि उन्हें पता है कि घर गृहस्थ में रहे हुए योगी ही उनकी मनोकामना को पूर्ण करेंगे। योगियों की शीतल छाया में ही मन की अग्नि शांत होगी व योगी ही जग से अंधकार को दूर कर प्रकाश लायेंगे। महान योगी जंगल में
नहीं जाते संसार में रहते हैं। लेकिन सांसारिकता उनके मन में नहीं रहती। उनके समक्ष उनके पूर्व व भविष्य का श्रेष्ट पार्ट स्पष्ट ही रहता है। उनकी स्वदर्शन चक्रधारी स्थिती बन
जाती है। कर्मयोग की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा संसार को सत्य शिक्षा तो केवल परमात्मा सदाशिव भगवान देते हैं और केवल वही इस सृष्टि परिवर्तन के संधिकाल में शुभ कर्म करने की विधि बताते हैं। शुभ कर्मों के बीज जगत में बोने का यही समय है। गीता वर्णित भगवान के महावाक्यों के अनुसार कल्प अन्त के साथ ही आरंभ भी आदिपिता सृष्टि रचता ब्रह्मा द्वारा किया जाता है। विश्व रूपी यह कल्प वृक्ष पुनः योग द्वारा कायाकल्प को प्राप्त हो रहा है। योगाभ्यास करते स्थित प्रज्ञ होने में ही कल्याण है। अध्यात्म का मुख्य प्रयोजन भी बुद्धि की साम्य अवस्था ही है। हमारा मन एक ऐसी निर्मल झील हो जो जय-पराजय की लहरों के द्वन्द्व के मध्य एक रस लवलीन स्मृति में आनन्द विभोर रहे। कार्यक्रम में सुबोध मिश्रा समाजसेवी तथा अन्य बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थें। ब्रह्माकुमारी केन्द्र में निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध है। तनाव गुक्ति मेडीटेशन अनुभूति
शिविर 07.30 बजे से 9.30 बजे प्रातः तथा 04.30 से 06.30 बजे सध्या तक प्रतिदिन आगे
भी जारी रहेगा।



