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उत्पादकता में प्रति हेक्टेयर मात्र एक क्विंटल की वृद्धि से भी राज्य और देश के कुल उत्पादन परिदृश्य में काफी अंतर आ जाएगा : कुलपति

राची, झारखण्ड  | मई |  27, 2025 ::

कृषि को ज्यादा लाभकारी बनाने के उद्देश्य से कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय की पहल पर 29 मई से प्रारंभ हो रहे राष्ट्रव्यापी ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के तहत बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक भी झारखण्ड के 24 जिलों में किसानों के द्वार तक पहुंचेंगे I पखवारा व्यापी यह अभियान 12 जून तक चलेगा I

इसके लिए बीएयू के कृषि विज्ञान केन्द्रों में कार्यरत वैज्ञानिकों के अलावा विश्वविद्यालय से लगभग 40 वैज्ञानिकों को शामिल कर कई टीमें बनाई गयी हैं, जो अलग-अलग समूहों में राज्य के सभी जिलों में पहुंचेगी और सभी हितधारकों को सामूहिक और समन्वित प्रयासों के माध्यम से उत्पादन और उत्पाकता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मंच प्रदान करेगी I हर टीम प्रतिदिन दो स्थानों पर जाएगी तथा हर स्थान पर 200 से 300 किसानों के साथ संवाद स्थापित करेगी I इसके लिए वाहन सम्बंधित जिलों के कृषि विज्ञान केन्द्रों तथा आइसीएआर संस्थानों द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा I अभियान की तैयारियों की समीक्षा के लिये कुलपति डॉ एससी दुबे क अध्यक्षता में बोर्ड रूम में एक बैठक हुई जिसमे सम्बंधित वैज्ञानिक तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों के प्रमुख ऑनलाइन जुड़े I कुलपति ने सभी वैज्ञानिकों से इस अभियान की सफलता के लिए तत्परता से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्पादकता में प्रति हेक्टेयर मात्र एक क्विंटल की वृद्धि से भी राज्य और देश के कुल उत्पादन परिदृश्य में काफी अंतर आ जाएगा I मिटटी विज्ञान के प्रोफेसर डॉ बीके अग्रवाल को इस कार्यक्रम का नोडल पदाधिकारी बनाया गया हैI

बीएयू के सामुदायिक विज्ञान विभाग की अध्यक्ष तथा इस अभियान की एडिशनल नोडल पदाधिकारी डॉ रेखा सिन्हा ने बताया कि यह अभियान कृषि दक्षता बढाने के लिए मांग आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देगा I इसका उद्देश्य समावेशी एवं सतत विकास के लिए किसान नेतृत्व वाले नवाचारों को बढ़ावा देते हुए अनुसंधान और उसके क्षेत्र अनुप्रयोग को बढ़ावा देना है ।

यह अभियान देश के 700 जिलों में चलेगा जिसमे 731 कृषि विज्ञान केन्द्रों, आइसीएआर के 113 शोध संस्थानों के अलावा कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्यपालन विभाग के अधिकारी तथा नवोन्मेषी किसान भी भाग लेंगे I उद्देश्य देश के 1.5 करोड़ किसानों तक पहुंचना और उनसे प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना है I

 

 

 

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