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ठंड के मौसम में निमोनिया होने के चांसेस ज्यादा हो जाते हैं : डॉ देवदत्ता बंधोपाध्याय

राची, झारखण्ड  | नवम्बर |  11, 2024 ::

विश्व निमोनिया दिवस के मौके पर मेदांता रांची की एसोसिएट कंसलटेंट डॉक्टर देवदत्ता बंदोपाध्याय ने न्यूमोनिया के प्रति आगाह करते हुए यह बातें कहीं।
डॉक्टर देवदत्ता ने बताया कि न्यूमोनिया के होने के कई कारण है। यह बैक्टीरिया वायरस, इन्फ्लूएंजा, कोविड, फंगल इनक्शन जैसे कारणों से होता है। वैसे लोग जिनको हर्ट डिजीज, क्रॉनिक लंग डिजीज, अस्थ्मा, सीओपीडी, किडनी के पेशेंट, कैंसर के पेशेंट या जो लोग कोल माइनस में काम करते उनको ज्यादा खतरा होता है । वैसे व्यक्ति जिनको दमा है उनको निमोनिया होने का खतरा अन्य से छह से सात गुना ज्यादा बढ़ जाता है।
उनका कहना था कि न्यूमोनिया एक ऐसी बीमारी है जिसे वक्त पर अगर इसका इलाज किया जाए तो इससे पूरी तरीके से बचाव किया जा सकता है। कोई भी अगर अपने निमोनिया के लक्षणों पर ध्यान रखें और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें तो इससे बचाव संभव है। इसके लक्षणों में बुखार आना, खांसी, सांस फूलना, हाथ व पैर में नीलापन, बहुत तेजी से सांसों का चलना होता है।
मौसम में हो रहे बदलाव पर डॉक्टर देवदत्ता ने बताया कि ठंड के मौसम में निमोनिया होने के चांसेस ज्यादा हो जाते हैं। एक तो मौसम में बदलाव रहता है दूसरा इस मौसम में सिंपल वायरल फीवर भी लोगों को होता है। ठंड के मौसम में कई बार लोग रेगुलर एक्सरसाइज नहीं करते हैं या फिर सूर्य के धूप से दूर रहते हैं। पानी कम पीते हैं। ऐसे लोगों को निमोनिया होने का खतरा ज्यादा होता है। कई बार लोग सर्दी जुकाम को नजरअंदाज भी कर देते हैं कि मौसम में बदलाव से ऐसा हो सकता है। इस मौसम में इन सारी बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है। कई ऐसे वैक्सीन भी हैं जिनको लेने से न्यूमोनिया से बचाव किया जा सकता है। ये वैक्सीन हाई रिस्क पेशेंट, बुजुर्गों और बच्चों को लगाया जाता है जिससे इस गंभीर बीमारी से बचाव हो सके।

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