माहेश्वरी समाज के द्वारा भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाई जाने वाली कजली तीज यानी सातूड़ी तीज सोमवार को मनाई गई। इसे कजली तीज, बड़ी तीज और सातुड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखेंगी। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और नीमड़ी माता (कजली माता) की विधि-विधान से पूजा की जाती है।रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने और दर्शन करने के बाद ही व्रत खोला जाता है। विशेष प्रकार के सतू जैसे आटा,बेसन,मैदा का बनाया जाता है तीज पर झुला झूलने का विशेष महत्व है .झूले की व्यवस्था लक्ष्मी नारायण सभागार में की गई है




