राची, झारखण्ड | अप्रैल | 15, 2025 ::
संत जेवियर्स कॉलेज राँची के स्नातकोत्तर वनस्पति विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय बेनेवोलेंट रिसर्च फाउंडेशन, कोलकाता व आईक्यूएसी और ग्लोबल वार्मिंग रिडक्शन सेंटर, कोलकाता द्वारा कॉलेज के फादर प्रूस्ट सभागार में 12 अप्रैल से 14 अप्रैल तक “जैव विविधता, पारिस्थितिकी व जलवायु परिवर्तन” विषयों पर जोर देने के लिए तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन का आयोजन किया गया|
सम्मलेन की शुरुआत 12 अप्रैल के सांध्य वनस्पति विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव के स्वागत संबोधन व दीप प्रज्ज्वलन से हुई| सम्मेलन के पहले दिन बेनेवोलेंट रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. सुबीर मुखोपाध्याय ने आईबीआरएफ का परिचय कराते हुए प्रकृति पर मानवीय लालच के प्रभाव पर ध्यान आकृष्ट कराया| लेथब्रिज विश्वविद्यालय कनाडा के डॉ. सैकत कुमार बासु ने भी वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों पर अपने विचार साझा किया| सम्मेलन के दूसरे दिन शुरुआत कुल चार तकनीकी सत्रों के साथ हुई| पहले दो सत्रों में विशेषज्ञों ने अपने-अपने क्षेत्रों में व्याख्यान दिया| इसके बाद पहले तीन तकनीकी सत्रों में मौखिक प्रस्तुतियां दी गयीं व चौथे सत्र में पोस्टर प्रस्तुति हुई| कुल 95 एब्सट्रैक्ट जमा कराये गए जिनमें 10 सबसे शानदार थे| दूसरे दिन का समापन डॉक्टरेट दीक्षांत समारोह के साथ हुआ| राँची विश्वविद्यालय के तकनीकी सलाहकार प्रो. बी. के. सिन्हा, प्राध्यापिका डॉ. अनिता सिन्हा, डॉलफिन रिसर्च के डॉ. गोपाल शर्मा, मखाना रिसर्च के डॉ. जनार्दन जी, पूर्व कुलपति डॉ. चंद्रशेखर चक्रवर्ती व डॉ. सुदीप बरात ने भी व्याख्यान दिए|
सम्मेलन के अंतिम दिन में वक्ताओं ने जैव प्रौद्योगिकी और पारिस्थितिकी को सहयोग देने में इसकी भूमिका, अनुसन्धान, और इसके घटकों तथा जीवों के विभिन्न समूहों द्वारा सामना किए जाने वाले मानवीय शोषण जैसे विषयों पर जानकारी उपलब्ध करायी गयी| अंत में मौखिक व पोस्टर प्रस्तुति विजेताओं को सर्टिफिकेट दी गयी| समेल्लन में 170 प्रतिभागियों ने भाग लिया जो झारखंड राज्य व राज्य से बाहर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और विभागों के सम्मानित प्रतिनिधि, प्रोफेसर, शोधार्थी और छात्र शामिल थे। सम्मेलन में प्रतिभागियों को पर्यावरणीय गिरावट एवं उसके संरक्षण के दबावपूर्ण मुद्दों पर ज्ञान, अंतर्दृष्टि और नवीन विचारों को साझा करने के लिए मंच प्रदान किया। सम्मेलन ने सहयोग और बौद्धिक चर्चा की भावना को बढ़ावा दिया। इसने पर्यावरण की रक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने में सामूहिक कार्रवाई के महत्व पर जोर दिया, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए हमारे ग्रह को संरक्षित करने की प्रतिबद्धता को प्रेरित किया गया। सम्मलेन का समापन प्राध्यापिका स्वर्णिमा झा ने किया| मौके पर विभाग के डॉ. मधुलिका सिंह, डॉ. फादर केनेडी सोरेंग, जेसिका हांसदा, अरोमा बारला, सुनिधि सहित कॉलेज के अन्य प्राध्यापकगण उपस्थित थे|




