राची, झारखण्ड | फरवरी | 21, 2025 ::
* भाषाओं पर रिसर्च को बढ़ावा देना होगा : डॉ उमेश नन्द तिवारी
• मातृभाषा को बचाने के लिये हमें अपनी संस्कृति को बचाना होगा.
रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया.
इस अवसर पर नागपुरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ उमेश नन्द तिवारी ने कहा कि मातृभाषा को बचाने के लिये हमें अपनी संस्कृति को बचाना होगा. उन्होंने कहा कि जिस समाज के मातृभाषा का विकास नहीं हुआ, वह समाज और क्षेत्र विपुल संसाधनों के बावजूद भी कभी विकास नहीं कर पाया. उन्होंने कहा कि हमें अपनी भाषा को चैलेंज के रूप में लेना होगा, क्योंकि जिस समाज की अपनी मातृभाषा और अपनी संस्कृति नहीं होती है उस समाज की अपनी कोई पहचान नहीं होती है. उन्होंने कहा कि इन भाषाओं पर रिसर्च करना होगा, स्कूली स्तर पर इन्हें बढ़ावा देना होगा, इन्हें रोजगार परक बनाना होगा, वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए इन्हें तैयार करना होगा तथा इन भाषाओं का सरलीकरण करना होगा
खड़िया विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ बन्धु भगत ने कहा कि भाषा अपने समाज की प्रतिबिम्ब होती है, यदि वह संरक्षित व सुरक्षित नहीं रहेगी तो प्रतिबिम्ब की कल्पना नहीं की जा सकती है. लुप्त हो रही भाषाओं पर सिर्फ चिंता व्यक्त करने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता है बल्कि हम सबों को इस दिशा में मिलकर काम करना होगा.
मुण्डारी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ मनय मुण्डा ने कहा कि भाषा माँ के दूध के समान है. इसकी रक्षा का दायित्व हम सबों का है. चूंकि भाषा के बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है.
इसके अलावा डॉ मेरी एस सोरेंग, डॉ कुमारी शशि, डॉ गीता कुमारी सिंह, डॉ रीझू नायक, डॉ दिनेश कुमार, डॉ बीरेन्द्र कुमार महतो, करम सिंह मुंडा, डॉ दमयंती सिंकूू, डॉ बन्दे खलखो, अनुराधा मुण्डू, अबनेजर टेटे, शकुन्तला बेसरा, गुरूचरण पूर्ति, विक्की मिंज, प्रेम मुर्मू, राजकुमार बास्के, तारकेश्वर सिंह मुंडा ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किये. संचालन प्राध्यापक डॉ वीरेंद्र कुमार सोय ने किया.
मौके पर जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा केन्द्र के छात्रों एवं शोधार्थियों ने गीत प्रस्तुत किया. इस अवसर पर भाषा केन्द्र के प्राध्यापकगण, शिक्षकेत्तर कर्मचारीगण, शोधकर्तागण एवं छात्र छात्राएं उपस्थित थे.




