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“मौसम विज्ञान डेटा संग्रह और विश्लेषण” पर संगोष्ठी

राची, झारखण्ड  | फरवरी |  05, 2025 ::

सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के भूगोल विभाग ने आईक्यूएसी (IQAC) के सहयोग से “मौसम विज्ञान डेटा संग्रह और विश्लेषण” पर एक दिवसीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. अभिषेक आनंद उपस्थित रहे, जिन्होंने उन्नत मौसम विज्ञान तकनीकों और उनके वास्तविक अनुप्रयोगों पर बहुमूल्य जानकारी प्रदान की।
संगोष्ठी की शुरुआत प्राचार्य फादर, डॉ. रॉबर्ट प्रदीप कुजूर, एस.जे. की गरिमामयी उपस्थिति से हुई। साथ ही डॉ. राजीव रंजन श्रीवास्तव, डॉ. संदीप चंद्र, श्रीमती एंजेलीन टोप्पो, गॉडविन परेरा और सुश्री उत्कर्षा जैसी प्रतिष्ठित संकाय सदस्यों ने अपनी सक्रिय भागीदारी से इस सत्र को अधिक प्रभावी और ज्ञानवर्धक बनाया। इस कार्यक्रम में कुल 85 विद्यार्थी एवं अन्य उपस्त्थित रहे।
अपने संबोधन के दौरान, वैज्ञानिक एवं मौसम विज्ञान प्रमुख डॉ. अभिषेक आनंद ने संयुक्त मौसम पूर्वानुमान प्रणाली (Integrated Weather Forecasting System) पर विस्तृत चर्चा की, जो ग्राउंड स्टेशनों, हॉट एयर बैलून, सैटेलाइट, AWOS (ऑटोमैटिक वेदर ऑब्जर्विंग सिस्टम) और शिप-बोर्न उपकरणों सहित कई स्रोतों से डेटा एकत्र करती है। उन्होंने तापमान अंशांकन (Temperature Calibration) के महत्व को रेखांकित किया और आद्र और शुष्क बल्ब थर्मामीटर (Wet & Dry Bulb Thermometers) तथा अधिकतम और न्यूनतम तापमान मापने की तकनीकों पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी के दौरान, विभिन्न सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों, विशेष रूप से कृषि, जल विज्ञान, और मानसून के दौरान भूजल पुनर्भरण में मौसम पूर्वानुमान की भूमिका पर जोर दिया गया। चूंकि झारखंड की कृषि मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर है, इसलिए चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि मौसम विज्ञान सेवाएँ बेहतर योजना और जोखिम न्यूनीकरण में कैसे मदद कर सकती हैं।
इसके अतिरिक्त, डॉ. अभिषेक आनंद ने दो विश्वसनीय मौसम संबंधित मोबाइल ऐप्स से भी परिचित कराया: SACHET – यह ऐप आपदा प्रबंधन और सतर्कता सूचनाओं के लिए एक व्यापक समाधान प्रदान करता है। DAMINI – यह विशेष रूप से बिजली गिरने की वास्तविक समय में जानकारी और सुरक्षा उपाय प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है।
यह संगोष्ठी मौसम विज्ञान डेटा संग्रह और उसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सफल रही, जिससे आपदा प्रबंधन, पर्यावरणीय योजना, और कृषि स्थिरता में मौसम पूर्वानुमान की महत्वपूर्ण भूमिका को पुनः स्थापित किया गया।

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