राची, झारखण्ड | अक्टूबर 24, 2024 ::
पिछले दो-तीन हफ्ते से पूरे शरीर के अत्यधिक फूल जाने, पेट और लंग्स में पानी भर जाने, लीवर के काम नहीं करने, खाना नहीं खाने तथा मुष्किल से पानी पीने से परेशान झारखण्ड के एक 45 वर्ष के व्यक्ति की मेदांता अब्दुर रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स हॉस्पिटल, रांची में पेरीकार्डिएकटमी आॅपरेशन कर राहत दिलाई गई। आॅपरेशन करने वाले हाॅस्पिटल के डाॅ. बालामुरली श्रीनिवासन ने बताया कि जब मरीज को मेदांता हाॅस्पिटल में भर्ती कराया तो खून की जांच, सिटी स्कैन तथा इको जांच में पेरीकार्डियम में गड़बड़ी का पता चला। उन्होंने कहा कि मरीज को पहले टी.बी. हुआ था जिसकी दवा बीमारी के ठीक होने से पहले बंद कर दी गयी। कुछ दिन तो मरीज ठीक रहा, पर बाद में उसके अन्य अंग में भी टी.बी. का संक्रमण फैल गया जो पेरीकार्डियम तक पहुंच गया।
डाॅ. श्रीनिवासन ने बताया कि पेरीकार्डियम हृदय का आवरण है जिसमें टी.बी. का संक्रमण हो जाने से सदा नरम रहने वाला पेरीकार्डियम सख्त हो गया। इस कारण हृदय पर दबाव बढ़ गया। टी.बी. की दवा के कारण पेरीकार्डियम में मवाद इकट्ठा हो गया जिससे वह सख्त हो गया। डाॅ. श्रीनिवासन ने बताया कि तब हमने हृदय को बिना बाइपास किये पेरीकार्डियम को हटा दिया। साधारणतया हृदय को बाइपास कर पेरीकार्डियम को हटाया जाता है, लेकिन इसके बिना हृदय को सुरक्षित रखते हुए उसे हटाया। इसके बाद मरीज की बायपसी की गयी तो उसमें टी.बी. का संक्रमण आ गया। इसकी दवा चल रही है। डाॅक्टर ने कहा कि जब पेरीकार्डियम सख्त हो गया था, उस समय हृदय द्वारा पम्प किये जाने वाला आॅक्सीजन युक्त खून सभी अंगों पर जा तो रहा था, पर लौटने वाला नीला खून हृदय तक इसलिए नहीं पहुंच पाता था क्योंकि पेरीकार्डियम काम नहीं कर रहा था। नीला खून लौटाने का काम करने वाला वीनस सिस्टम का दबाव कम रहता था, इससे हृदय के चेम्बरों पर काफी दबाव था। नीला खून हृदय में लौटने की जगह शरीर में ही रह जाता था, इसलिए पूरा शरीर अत्यधिक फूल गया। इसी वजह से लीवर ने काम करना बंद कर दिया था तथा पेट और लंग्स में पानी भर गया था। डाॅ. बालामुरली ने बताया कि अब वह बिल्कुल ठीक है तथा सामान्य तरीके से खाना-पीना ले रहा है।
हाॅस्पिटल के डायरेक्टर श्री विश्वजीत कुमार ने बताया कि हमारे यहां प्रत्येक विभाग में विशेषज्ञ और अनुभवी डाॅक्टर मौजूद हैं। इस कारण मरीजों का इलाज आधुनिकतम तरीकों से किया जाता है। हमारे यहां के डाॅक्टर मरीज को ठीक करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।




