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बहुत ही दुर्भाग्य का विषय है कि फिल्मे दर्शाने के लिए सिनेमा हॉल उपलब्ध नहीं : चैम्बर

राची, झारखण्ड  | मई |  17, 2025 ::

 

दिनांक 17 मई को झारखण्ड चैम्बर की फिल्म, कला एवं संस्कृति उप समिति की बैठक चैम्बर भवन में संपन्न हुई जिसमें राज्य भर से फिल्म कला के क्षेत्र से जुड़े फिल्म निर्माता एवं कलाकारों ने इस बैठक में हिस्सा लिया | यह कहा गया कि राज्य के सभी सिनेमाघरों में प्रतिदिन एक प्राइम टाइम शो क्षेत्रीय भाषाओँ की फिल्मों के लिए आरक्षित किया जाए, यह बहुत ही दुर्भाग्य का विषय है कि फिल्म तो बन जा रही है परन्तु उसे दर्शाने के लिए सिनेमा हॉल उपलब्ध नहीं है, झारखण्ड की ही फिल्मों को झारखण्ड के सिनेमाघरों में कोई स्थान नहीं दिया जाता, अन्य राज्यों के तर्ज पर झारखण्ड में भी क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों को प्रतिदिन दिखाया जाए | इस बात पर भी चर्चा की गई कि फिल्मों को दी जाने वाली सब्सिडी जो कि आठ सालों से बंद है इससे झारखण्ड के कलाकार बेरोजगारी के कगार पर है जबकि यह सरकार की फिल्म नीति में शामिल है बावजूद इसके सब्सिडी नहीं दी जा रही है इसे भी गंभीरता से संज्ञान में लिया जाए | चैम्बर अध्यक्ष परेश गट्टानी एवं महासचिव आदित्य मल्होत्रा ने संयुक्त रूप से कहा कि एक छोटी सी फिल्म बनाने में 40-50 लाख की लागत लगती है इसे प्राथमिकता मिलनी चाहिए साथ ही क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों को टैक्स फ्री भी किया जाना चाहिए ताकि यहाँ के लोगों को प्रोत्साहन मिले जिससे यहाँ पर पर्यटन भी बढेगा और सरकार को भी राजस्व की प्राप्ति होगी | इस बात पर भी चर्चा की गई कि राज्य के 12 जिलों में एक भी सिनेमाघर नहीं है | जिसके कारण दर्शकों तक फ़िल्में नहीं पहुँच पाती हैं, फिल्मकारों को जिला भवन, ब्लाक हॉल, सामुदायिक भवन, धमकुडिया भवन आदि स्थानों में फिल्मकारों को अपनी फिल्म दिखाने की अनुमति दी जाए, इससे सरकार को राजस्व भी बढेगा साथ ही गाँव-गाँव तक सरकार की लाभुक योजनाओं को भी फिल्म के बीच में प्रचार के तौर पर डालकर आसानी से पहुँचाया जा सकता है |

 

आज की बैठक में चैम्बर अध्यक्ष परेश गट्टानी, उपाध्यक्ष ज्योति कुमारी, महासचिव आदित्य मल्होत्रा,सह सचिव नवजोत अलंग मौजूद थे |

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