राची, झारखण्ड | मई | 15, 2025 ::
पंचायती राज विभाग के द्वारा पेसा विचार गोष्ठी कार्यशाला का आयोजन किया गया . इसका उद्देश्य पेसा अधिनियम के तैयार ड्राफ्ट पर चर्चा रहा . कृषि , पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए पंचायती राज विभाग की इस पहल की सराहना की . उन्होंने कहा कि वर्तमान पेसा कानून को लेकर जो उलझने है उसे सुलझा पाना इतना आसान नहीं है . लेकिन सरकार ने सकारात्मक सोच के साथ आलोचनाओं को आमंत्रित किया है . आज जब पेसा कानून पर राज्य में गंभीर चर्चा हो रही है तब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस कथन को याद करने की जरूरत है . उन्होंने कहा था देश विकास कर रहा है और आगे भी करता रहेगा . लेकिन परंपरा , सभ्यता और संस्कृति धूमिल हो गई , तो इस विकास का कोई फायदा नहीं होगा . आदिवासी समाज के विकास के लिए बजट का प्रावधान होता है लेकिन उस पैसे का सही उपयोग कैसे हो ये सबसे बड़ी चुनौती है . इस विकास में आदिवासी _ मूलवासी की परंपरा और संस्कृति का संरक्षण भी शामिल होना चाहिए . मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि आज दिलीप सिंह भूरिया समिति की रिपोर्ट को अध्ययन करने की जरूरत है . उस रिपोर्ट में राज्य सरकार और ग्राम सभा के बीच बेहतर समन्वय जानकारी मिलेगी . ये बहुत जरूरी है . किसका क्या अधिकार हो ये सुनिश्चित करना होगा . पांचवीं अनुसूची वाले राज्यों में आदिवासी समाज के संरक्षण के लिए पहले से कानून बने हुए है . इस कानून में आदिवासी और मूलवासी के संरक्षण को तय किया गया है . आदिवासी समाज में सामूहिकता की भावना होती है . आज जरूरत है तो अपने दायित्व और जिम्मेवारी को समझने की . पंचायती राज विभाग ने बेहतर पहल की है और इस पहल का परिणाम भी बेहतर होगा .


