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राची, झारखण्ड  | सितम्बर   23, 2024 ::

श्रद्धांजलि : स्व. अशोक नागपाल के आठवीं पुण्यतिथि पर विशेष

– संदीप नागपाल

स्व. अशोक नागपाल रांची शहर में एक जाना पहचाना नाम है जो समाज के प्रति शहर के आम नागरिकों के प्रति अपना योगदान हर क्षेत्र में बढ चढ कर दिया है। चाहे वह यात्री सुविधाएं हो या सरकारी गैर सरकारी किसी भी तरह का कार्य हो। आम आदमी की आवश्यकता पड़ने पर बड़े से बड़े से बड़े अफसरों तक सीधे उन तक पहुंच कर परेशानियों एवं समस्या का निराकरण करवाने में अहम योगदान देते थे। रेलवे में राज्य के जनसुविधाओं की आवाज को केन्द्र एवं राज्य के मंत्री तथा आलाधिकारियों तक पहुंच कर या पत्राचार कर जनता की उचित मांगों को साकार करने या करवाने में अपना भरपूर योगदान देने में हमेशा तत्पर रहते थे। राजनीतिक पार्टी हो या सामाजिक कार्य अशोक जी अपनी भागीदारी बड़ी तत्परता एवं सूझबूझ के साथ निभाते थे।  जनसंघ काल से जुड़े और अंत तक राष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के लिए व्यक्तिगत हित को नजरअंदाज करके राष्ट्र हित में कार्य किया। संगठन को मजबूत बनाने में हमेशा तन मन धन से निष्काम भाव से सहयोग किया।

पश्चिम पाकिस्तान के बन्नु शहर में 13 अक्टूबर 1939 को नागपाल जी का जन्म हुआ। महज 7 वर्ष की आयु में भारत पाकिस्तान बंटवारे के समय अपने माता पिता के साथ भारत आए। सब कुछ बिखर जाने के बाद उन्होंने रांची में अपने पिता स्व. मनोहर लाल नागपाल एवं माता हरदेवी नागपाल को हिम्मत दिलाते हुए अपने पुश्तैनी कारोबार मालवाहक ट्रांसपोर्ट शुरु किया। अपनी पढाई भी संत जेवियर कालेज और रांची विश्वविद्यालय से पूरी की और व्यवसाय को भी नए ऊंचाई पर पहुँचाया। जो आज रांची शहर में नागपाल ट्रांसपोर्ट एंड ट्रेवल्स के नाम से किसी परिचय का मोहताज नहीं है। अशोक जी ने रांची नागरिक समिति की स्थापना की और संस्था के बैनर तले कई जन समस्याओं तथा यात्री परेशानियों के निराकरण  के लिए सफलता पूर्वक आंदोलन भी चलाया। इनके व्यवहार कुशलता के कारण इनके टीम में पूर्व मंत्री, सांसद, पत्रकार, डाक्टर, वकील एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरपूर सहयोग मिला। रांची में पंजाबी हिन्दू बिरादरी के दशहरा रावण दहन कार्यक्रम की शुरूआत कराने में इनका अहम योगदान रहा। अशोक जी अपने हाथों से रावण का पुतला तैयार करते थे और पूरे कार्यक्रम को अंजाम तक ले जाते थे। पत्रकारिता में शुरु से इनकी रूचि रही। शुरूआती दौर से दैनिक रांची एक्सप्रेस से जुड़े। पत्रकारिता में कलम पकड़ना स्व. रत्नेश जैन तथा पद्मश्री बलबीर दत्त से सीखा और इन्हें अपने पत्रकारिता जगत का गुरु माना। नागपाल जी ने छोटानागपुर पैसेंजर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष पद पर कई वर्षों तक सेवा दी और एसोसिएशन को नई उंचाईयों तक ले गए। चैम्बर ऑफ कामर्स में लगातार 13 वर्षों तक जीत हासिल कर एक्जिक्युटिव कमेटी में अपना योगदान दिया।

अशोक जी धार्मिक प्रवृत्ति के थे और इन्हें धार्मिक विचार सुनने का बहुत शौक था। विगत 35 वर्षों से  वे संत निरंकारी मंडल से जुड़े रहे और पी. आर. ओ. के रूप में अपनी सेवाएं दी। नागपाल जी हर किसी के सुख दुख के साथी थे। उनकी सबसे बड़ी खाशियत थी कि किसी भी जाति एवं मजहब को मानने वाले हों उनके कार्यक्रम में पूरी तन्मयता के साथ भागीदारी निभाते थे।

नागपाल जी विगत 32 वर्ष से अपने कार्यालय के सामने सार्वजनिक स्थल पर सांझी लोहड़ी का आयोजन रांची नागरिक समिति के बैनर तले करते आ रहे थे। इस त्योहार में रांची क्षेत्र के सांसद, मंत्री, विधायक, वरिष्ठ पत्रकार को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित कर बहुत ही सरलता एवं सादगी के साथ मनाते थे। साथ ही साथ शहर के वरिष्ठ  नागरिक, बुद्धिजीवी, चैम्बर ऑफ कामर्स, जे जे रोड महल्ला समिति तथा अन्य संस्थाओं के पदाधिकारियों को भी आमंत्रित करते थे।

ऐसे नेक एवं दिलेर व्यक्ति स्व. अशोक नागपाल जी अपने परिवार एवं समाज में अनूठी छाप  छोड़कर शारीरीक रूप से सदा के लिए विलोप हो गए। ऐसे महान सख्शियत जिन्होंने अपने जीवन का एक समर्पित सफर तय किया उन्हें कोटि कोटि नमन है।

आप थे तो हमें छांव का अहसास होता था।

अब तेज धूप में कोई छाया नजर आती नहीं।

कल 24 तारीख को अल्बर्टा एक्का चौक के पास स्वर्गीय अशोक नागपाल की आठवीं पुण्यतिथि के दिन चार से पांच बजे संध्या 500 निशुल्क फलदार पौधों का वितरण किया जाएगा जिसमें शहर के विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी अपनी सहभागिता निभाएंगे

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