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जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता, सशक्त समुदाय और टिकाऊ खेती झारखंड को बदल सकते हैं” : शिल्पी नेहा तिर्की

 

झारखंड सरकार की कृषि, पशुपालन और सहकारिता मंत्री, टीआरआई झारखंड चैप्टर और एक्सआईएसएस द्वारा आयोजित ‘इंडिया रूरल कोलोक्की 2026’ के में बोल रही थीं।

‘ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया’ (टीआरआई) के स्टेट चैप्टर और ज़ेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल सर्विस (एक्सआईएसएस), रांची द्वारा आयोजित ‘इंडिया रूरल कोलोक्की 2026’ में, झारखंड सरकार की कृषि, पशुपालन और सहकारिता मंत्री, माननीय शिल्पी नेहा तिर्की ने ग्रामीण झारखंड को समृद्ध बनाने का अपना विज़न सामने रखा, जो जलवायु सहनशीलता, टिकाऊ खेती और समुदाय-आधारित विकास पर टिका है।

अपने शुरुआती संबोधन में उन्होंने कहा, “झारखंड के समृद्ध प्राकृतिक संसाधन, उपजाऊ भूमि और मज़बूत समुदाय एक संपन्न ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनाने के अपार अवसर देते हैं। जलवायु-अनुकूल खेती में निवेश करके, स्थानीय संस्थाओं को मज़बूत बनाकर, और किसानों व पंचायतों को सशक्त बनाकर, हम अपनी प्राकृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाते हुए टिकाऊ आजीविका बना सकते हैं।”

शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय के क्षेत्रों में मापने योग्य लक्ष्यों वाले रोडमैप ‘उलगुलान 2050’का ज़िक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा, “ग्रामीण झारखंड में समावेशी और टिकाऊ विकास हासिल करने के लिए जलवायु के प्रति संवेदनशीलता, सशक्त पंचायतें और सामुदायिक नेतृत्व ज़रूरी स्तंभ हैं।”

इससे पहले, एक्सआईएसएस, रांची के सहायक निदेशक, डॉ प्रदीप केरकेट्टा एसजे ने ज़ोर दिया कि टिकाऊ विकास के लिए न केवल प्रभावी नीतियों की ज़रूरत है, बल्कि एक मज़बूत झारखंड बनाने में हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी भी ज़रूरी है।

इस साल के झारखंड चैप्टर में शोधकर्ताओं, सामुदायिक चैंपियंस और विकास कार्यों से जुड़े लोगों को एक साथ लाया गया ताकि ‘उलगुलान 2050’के लिए मापदंड तय की जा सकें। साथ ही, जल प्रबंधन, जलवायु अनुकूलन, ग्रामीण उद्यमिता, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सामूहिक कार्रवाई जैसे मुद्दों पर चर्चा भी की गई।

टीआरआई की एसोसिएट डायरेक्टर शीला मतांग ने चर्चा करते हुए कहा, “सरकारें बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं, समुदाय ज़मीनी स्तर से बदलाव का नेतृत्व कर रहे हैं, उद्यमी वहाँ अवसर बना रहे हैं जहाँ पहले कुछ नहीं थाऔर परोपकारी संस्थाएं साहसिक प्रयोगों का समर्थन कर रही हैं। और इसीलिए, यह मंच सभी प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाना चाहता है, ताकि वे सीख सकें, अनुभव साझा कर सकें और मिलकर समाधान गढ़ सकें।“

पैनल चर्चाओं में ग्रामीण विकास विभाग की एडिशनल सेक्रेटरी, प्रेरणा दीक्षित (आईएएस) और वरिष्ठ प्रैक्टिशनर व जल संरक्षण विशेषज्ञ, दीनबंधु करमाकर के विचार शामिल थे। पद्म श्री चामी मुर्मू, पद्म श्री जमुना टुडू के साथ डॉ अनंत कुमार, डॉ राज श्री वर्मा, कविता देवी, बाला देवी निंगथौजम और डॉ दीप्ति परिधि किंडो जैसे अन्य विशेषज्ञों ने पर्यावरण की स्थिरता, जलवायु के प्रति नीतियों, समुदाय के नेतृत्व वाले तरीकों और स्थानीय संस्थाओं को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

इस चर्चा के दौरान, PRADAN, World Resources Institute (WRI), Centre for Research and Innovation in Social Policy (CRISP) और Foundation for Ecological Security (FES) जैसे प्रमुख विकास संगठनों के साथ-साथ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विकास पेशेवरों ने इनोवेशन को बढ़ावा देने, ग्रामीण शासन को मजबूत करने और टिकाऊ विकास के तरीकों को आगे बढ़ाने पर अपने विचार साझा किए।

इस कार्यक्रम में ज्ञान-संबंधी संसाधनों को लॉन्च किया गया और बुधवार को आयोजित हैकाथॉन के विजेताओं को सम्मानित भी किया गया। एक्सआईएसएस, रांची का रूरल मैनेजमेंट प्रोग्राम की छात्राएं – रुखसार खानम, विन्नी विशाखा और इशिता, ग्रामीण विकास की चुनौतियों से निपटने में अपने इनोवेटिव योगदान के लिए सम्मानित की गईं।

राज्य कोलोक्की का समापन मुख्य सिफारिशों को संकलित करते हुए हुआ, जिसमें सरकार, शिक्षा जगत, नागरिक समाज, निजी क्षेत्र और सामुदायिक संस्थाओं के बीच सहयोग के अवसर पहचाने गए, ताकि झारखंड में ग्रामीण बदलाव को तेज़ किया जा सके।

 

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