राची, झारखण्ड | मई | 23, 2025 ::
झारखंड में समय के साथ दूसरे प्रदेश से आ कर बसने वालों की आबादी बढ़ी है , वहीं आदिवासी समाज की जनसंख्या या तो घटी है या स्थिर है . ऐसे में अगर पांचवीं अनुसूची राज्यों में जनसंख्या को परिसीमन का आधार बनाया जाएगा , तो आरक्षित सीटों की संख्या में कमी आएगी . ये निर्णय आदिवासी समाज की सुरक्षा और संरक्षण को धूमिल करने वाला होगा . ये बात दिल्ली में देश भर के कांग्रेस प्रवक्ताओं की कार्यशाला को संबोधित करते हुए झारखंड की कृषि , पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कही है . इस कार्यशाला को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विशेष रूप संबोधित किया . देश में जातीय जनगणना का भारत के आदिवास समाज पर पड़ने वाले प्रभाव , चुनौती और समाधान विषय पर अपनी बात रखते हुए मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि कांग्रेस को एक बड़ी भूमिका तय करनी है . कांग्रेस जातीय जनगणना के तहत सामाजिक न्याय का संदेश और उद्देश्य लेकर आगे बढ़ाना चाहती है , जबकि केंद्र में बैठी बीजेपी और RSS इसे उलझाने में लगी है . आदिम काल से ही आदिवासी समाज में जातीय व्यवस्था का कोई स्थान नहीं है जबकि बीजेपी इसे जबरन थोपना चाहती है . मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनगणना प्रक्रिया में आदिवासी समुदाय को उनकी मूल और एकीकृत पहचान के साथ दर्ज किया जाना चाहिए , ना कि उप- वर्गों में विभाजित कर . देश भर में आदिवासी समाज समानता और एकता की मिसाल है . उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आदिवासी समुदाय न केवल सांस्कृतिक रूप से, बल्कि दिल और आत्मा से भी एक है , फिर चाहे वो झारखंड हो, मणिपुर हो , ओडिशा हो या छत्तीसगढ़ हो . जब देश के किसी कोने में एक आदिवासी पर हमला होता है, तो वह केवल एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश के आदिवासी समाज की पीड़ा बन जाती है . मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि सरना धर्मावलंबियों को अलग से कॉलम उपलब्ध कराया जाए .




