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बच्चों और किशोरों को समुदाय-आधारित जलवायु लचीला पर सशक्त बनाना पर राज्य स्तरीय परामर्श  

राची, झारखण्ड  | फरवरी |  18, 2025 ::

बच्चों और किशोरों को समुदाय-आधारित जलवायु लचीला पर सशक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय परामर्श (राज्य स्तरीय परामर्श ) का सफल आयोजन कैपिटल हिल, रांची में किया गया। इस आयोजन में बच्चों, किशोरों, जलवायु चैंपियनों, विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। यह कार्यक्रम सिनी (चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट) द्वारा आयोजित किया गया, जिसने इस अवसर पर अपनी 51 वर्षों की यात्रा को भी उजागर किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सामुदायिक पहलों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना था।

 

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक स्वागत समारोह से हुई, जिसमें स्वागत नृत्य, गीत और दीप प्रज्वलन शामिल था। उद्घाटन भाषण तन्वी झा (एसपीएम, सिनी झारखण्ड ) द्वारा दिया गया, जिसमें पूरे दिन की चर्चाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।

 

सिनी के संस्थापक डॉ. समीर चौधरी और कार्यक्रम प्रमुख मेघेंद्र बनर्जी ने संगठन की यात्रा और इसके योगदान को साझा किया, जिसमें स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, बाल अधिकार और लैंगिक समानता के क्षेत्र में इसके प्रयास शामिल हैं। डॉ. समीर चौधरी ने झारखंड को “असीमित संभावनाओं का राज्य” बताते हुए कहा कि सिनी का विज़न एक “अनुकूल और संवेदनशील समुदाय बनाना है, जहाँ बच्चे और किशोर अपनी पूरी क्षमता प्राप्त कर सकें।”

 

मुख्य चर्चाएँ और गतिविधियाँ:

 

यह  राज्य स्तरीय परामर्श अबूबकर सिद्दीकी (आईएएस), सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड सरकार की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। उन्होंने जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम आने वाली पीढ़ी के लिए पृथ्वी को रहने योग्य छोड़ें।

उन्होंने निम्नलिहित बातें रखीं :-

झारखंड और जलवायु परिवर्तन का खतरा

69% भूमि बंजर होने के कगार पर है।

10 जिले जलवायु परिवर्तन के उच्च जोखिम में हैं।

14 जिले मध्यम जोखिम वाले क्षेत्र में आते हैं।

साहिबगंज और पाकुड़ भारत के शीर्ष 50 सर्वाधिक जलवायु जोखिम वाले जिलों में शामिल हैं।

भारत दुनिया में ग्रीनहाउस गैसों का तीसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

2050 तक भारत की जीडीपी में 2.8% की कमी हो सकती है।

कृषि उत्पादकता पर गंभीर असर पड़ रहा है, जिससे मौसमी बाजारों में बाधा आ रही है।

जलवायु परिवर्तन का असर कुपोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी हो रहा है।

पिछले वर्ष भारत में 54.8 मिलियन बच्चे  हीटवेव से प्रभावित हुए थे।

कार्यवाही की आवश्यकता

जीवनशैली में बदलाव और पर्यावरण संरक्षण की तत्काल जरूरत है।

हर धर्म पर्यावरण संरक्षण पर जोर देता है।

झारखंड की आदिवासी समुदायों की परंपरा जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

भारत 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

समाधान और सुझाव

उन्होंने गुमला जिले के रायडीह  ब्लॉक में सिनी के जलवायु परिवर्तन हस्तक्षेप मॉडल की सराहना की

पंचायत स्तर पर जलवायु अनुकूलन योजनाएं बनाकर बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा।

युवा जलवायु चैंपियन मॉडल के माध्यम से युवाओं को जागरूक और सशक्त बनाना।

मल्टी-स्टेकहोल्डर दृष्टिकोण अपनाते हुए मीडिया, सीएसओ, नीति-निर्माताओं, धार्मिक संगठनों और सामुदायिक समूहों की भागीदारी आवश्यक है।

स्कूलों के पाठ्यक्रम में जलवायु शिक्षा को शामिल किया जाना चाहिए।

हमारी जिम्मेदारी है कि हम पृथ्वी को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और रहने योग्य बनाएं।

स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

डॉ. कमलेश कुमार (राज्य क्षय रोग अधिकारी एवं नोडल, जलवायु परिवर्तन) ने स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को उजागर किया।

 

समुदाय की आवाज :

गुमला जिले के कुडो छतररपुर, रायडीह  ब्लॉक की मुखिया चुयान कुजुर और सुरसंग पंचायत की मुखिया श्रीमती आशा सुचिता एक्का ने समुदाय, विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के मुद्दों के प्रति जागरूक करने एवं पंचायत सस्तरीय जलवायु लचीलापन प्लान निर्माण में सिनी के प्रयासों की तारीफ की ।

 

सिनी की युवा जलवायु चैंपियन टीम ने भी जलवायु परिवर्तन संबंधी अभियानों में अपनी भागीदारी और अनुभव साझा किए।

 

पैनल चर्चा: विभिन्न हितधारकों की भूमिका

विशेषज्ञों और अधिकारियों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने में पंचायतों, शहरी स्थानीय निकायों, मीडिया और नागरिक समाज संगठनों की भूमिका पर चर्चा की।

पैनल के प्रमुख सदस्य थे:

गुरजीत सिंह (रिसोर्स सेल, अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी, झारखंड)

मनोज कुमार (रफ़्तार न्यूज़)

सुश्री मोनालिसा दत्ता (पर्यावरण विशेषज्ञ, सिनी)

नसरीन जमाल (आईसीआरडब्ल्यू)

पैनल चर्चा का संचालन श्री सुभदीप अधिकारी (सिनी) ने किया ।

 

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एवं जलवायु-थीम पर  कला प्रदर्शनी

बच्चों और किशोरों ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सांस्कृतिक नृत्य और नाटक के माध्यम से दर्शाया। कार्यक्रम का समापन “गैलरी वॉक” के साथ हुआ, जिसमें युवा जलवायु चैंपियनों द्वारा तैयार की गई ईको-डिज़ाइन कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गईं।

 

यह परामर्श कार्यक्रम युवाओं के नेतृत्व में जलवायु कार्रवाई की शक्ति को दर्शाता है और समुदाय को अधिक जलवायु लचीला (Climate Resilient) बनाने के लिए बहु-हितधारक दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

सिनी ने इस आयोजन के माध्यम से अपनी 51 वर्षों की यात्रा को साझा किया और अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि वह जलवायु परिवर्तन को अपनी प्राथमिकताओं में बनाए रखेगा और इसे अपने विभिन्न कार्यक्रमों में मुख्यधारा में लाने के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा।

 

इस कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में रंजन के. पांडा (अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन), अनुप होरे (प्लान इंडिया) सहित कई अन्य एनजीओ, सिनी के वर्तमान, पूर्व कर्मचारी एवं शुभचिंतक शामिल थे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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