राची, झारखण्ड | दिसम्बर | 25, 2024 ::
मारवाड़ी महाविद्यालय, रांची में प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार के दिशानिर्देश एवं आदेशानुसार जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा(खोरठा) द्वारा “खोरठा दिवस दिवस/श्रीनिवास पानूरी जयंती सह एकदिवसीय संगोष्ठी” का आयोजन अत्यंत ही धूमधाम से सफलतापूर्वक किया गया ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मारवाड़ी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार, डॉ. विनोद कुमार, समन्वयक जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग सह विभागाध्यक्ष खोरठा भाषा विभाग, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची एवं विशिष्ट अतिथि खोरठा साहित्यकार डॉ. गजाधर महतो ‘ प्रभाकर’ एवं रामगढ़ महाविद्यालय, रामगढ़ के खोरठा सहायक प्राध्यापक बीरबल महतो के साथ आमंत्रित अतिथियों में प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. आर.आर. शर्मा, डॉ. तरुण चक्रवर्ती, डॉ. अरविंद कुमार साव, डॉ. रितु घांसी, डॉ. दिनेश दिनमणि, श्री कृष्णकांत आदि की गरिमामई उपस्थिति रही ।
कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों के द्वारा श्रीनिवास पानूरी जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर किया गया । खोरठा भाषा के सहायक प्राध्यापक डॉ. अवध बिहारी महतो ने कहा खोरठा जो झारखंड में सबसे अधिक लोगों के द्वारा प्रयोग की जाने वाली भाषा है l इसे पुनर्जीवित करने का कार्य श्रीनिवास पानूरी जी ने साहित्य रचना के साथ किया इनका सहयोग स्व. विनोद बिहारी महतो एवं ए.के. राय जैसे आंदोलनकारियों ने किया । आज का यह विशेष दिन इस लिए भी खास है कि इसी दिन प्रभु ईशा मसीह और झारखंड के आंदोलनकारी शहीद निर्मल महतो जी का भी जन्मदिन है ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. विनोद कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि खोरठा हमारी मातृभाषा है और इससे ही हमारी पहचान है ।
डॉ. मनोज कुमार ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मातृभाषा सभी की होती है पर जिस भाषा के माध्यम से रोजगार उपलब्ध हो, वही विकास करता है ।
डॉ. आर.आर. शर्मा द्वारा कहा गया कि गरीबी की जिस पड़ाव से श्रीनिवास पानूरी जी ने खोरठा साहित्य को आगे ले जाने के लिए साहित्य की रचना की वह काबिले तारीफ है ।
डॉ. गजाधर महतो ‘प्रभाकर’ द्वारा विचार व्यक्त करते हुए कहा गया कि खोरठा झारखंड में 24-जिला में से 16-जिला में बोली जाती है ।
डॉ. दिनेश दिनमणि द्वारा विचार व्यक्त किया गया कि खोरठा हमारी मातृभाषा है और इसपर हमें गर्व है ।
बीरबल महतो द्वारा कहा गया कि खोरठा के विकास के लिए हम सभी खोरठा भाषी को आगे आना होगा ।
इस कार्यक्रम में मारवाड़ी महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ एन.एन. सी. के कैडेटों ने भी अपने- अपने विचार व्यक्त किए । उनके द्वारा खोरठा भाषा की मार्मिक गीत जो उनके जीवन से संबंधित था प्रस्तुत किया गया-
कते कानदब गे दइआ, देहीओ छटकी गेल-2
मइआ बपा मोरी गेल, कोइओ नाई साथे देल ।
कते कानदब गे दइआ, देहीओ छटकी गेल-2
आजा आजी पोसी लेल, सोभे कोइ छोड़ी देल ।
कते कानदब गे दइआ, देहीओ छटकी गेल-2 ।



