Breaking News Latest News राष्ट्रीय लाइफस्टाइल

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अणुव्रत प्रेरणा दिवस पर अणुव्रत अनुशास्ता ने दी पावन प्रेरणा

राची, झारखण्ड  | अक्टूबर   03, 2024 ::

*अणुव्रत नियमों का पालन कर गुडमैन बनने का प्रयास*
आचार्य महाश्रमण

अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अणुव्रत प्रेरणा दिवस के अवसर पर पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि परम पूज्य आचार्यश्री तुलसी ने अणुव्रत का कार्य आगे बढ़ाया था। अणुव्रत का यह मंतव्य है कि आदमी अपनी-अपनी धर्म-परंपरा में रहते हुए भी अणुव्रत नियमों का पालन कर गुडमैन बनने का प्रयास होना चाहिए। शिक्षा संस्थानों में खूब अच्छा कार्य चलता रहे।
अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का तीसरा दिन अणुव्रत प्रेरणा दिवस के रूप मे केन्द्रीय स्तर पर सुरत, गुजरात में समायोजित हुआ। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में वीर नर्मद गुजरात युनिवर्सिटि के वाइस चांसलर के वाइस चांसलर श्री किशोर चावड़ा उपस्थित थे। श्री चावड़ा ने आचार्यश्री को वंदन कर अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि सूरत शहर की धरती पर चतुर्मास करने वाले आचार्य महाश्रमणजी को मैं सादर नमन करता हूं। हम लोग तो हर वर्ष हजारों बच्चों की परीक्षा लेते हैं, लेकिन उनमें से मानव कितने बनते हैं? मानव बनाने का कार्य तो आचार्यश्रीजी कर रहे हैं। उन्होंने आचार्यश्री को अपनी युनिवर्सिटि में पधारने का अनुरोध भी किया।

विशेष ज्ञातव्य रहे कि सात दशक पूर्व भारत के महान समाज सुधारक आचार्य श्री तुलसी द्वारा प्रवर्तित अणुव्रत आंदोलन वरितमान मे नये निखरे और संगठित स्वरूप में मानव मात्र की सेवा के लिए कृत संकल्पित है। अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी की अनुशासना में अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी द्वारा स्थानीय स्तर से लेकर वैश्विक स्तर तक अणुव्रत की समस्त रचनात्मक प्रवृत्तियों का सुचारु रूप से संचालन हो रहा है।
अणुविभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर ने बताया कि अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा उद्घोषित अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह 1 अक्टूबर 2024 से 7 अक्टूबर 2024 तक भारत और नेपाल मे आयोजन में अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के निर्देशन में किया जा रहा है।
महामंत्री भीखम सुराणा ने बताया कि सातो दिनो के लिए केन्द्रीय स्तर अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के सानिध्य में हजारो की उपस्थिति में कार्यक्रम तय है। क्षेत्रिय स्तर पर इस प्रकार से तैयारियां की गई है कि अधिक से अधिक आम जन इससे लाभान्वित होंगे और धरातल पर परिष्कार और परिवर्तन नजर आयेगा।
इस कार्यक्रम की राष्ट्रीय संयोजिका डॉ. कुसुम लुनिया ने बताया कि 1 अक्टूबर को सांप्रदायिक सौहार्द दिवस, 2 अक्टूबर अहिंसा दिवस,3 अक्टूबर को अणुव्रत प्रेरणा दिवस,4 अक्टूबर पर्यावरणशुद्धि दिवस,5 अक्टूबर नशामुक्ति दिवस, 6 अक्टूबर अनुशासन दिवस और 7 अक्टूबर काोजीवन विज्ञान दिवस समेत पुरे सप्ताह का सैद्धान्तिक व प्रायोगिक दोनो स्वरूपों मे शानदार आयोजन की स्थानीय स्तर पर पुरी तैयारियां है। अणुव्रत मीडिया डीजीटली पुरा मुस्तैद है।यह आयोजन नगर पालिका, मन्दिर, मस्जिद, गिरजाघर, गुरूद्वारो, स्थानको व जैन भवनो के साथ साथ जेलो, बाल सुधारगृह, क्लब हाउसो ,पार्को, चौपालो,चोराहो और अन्याय सार्वजनिक स्थानो पर उत्साह से हो रहे है
1 अक्टूबर को सांप्रदायिक सौहार्द दिवस सद्भाव और मैत्री के भाव से ओत प्रोत अनेकता में एकता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए भव्य रूप में 90 स्थानो पर मनाया।
2 अक्टूबर अहिंसा दिवस पर अणुव्रत अहिंसा और विश्व शांति विषयक में 104 से ज्यादा सार्थक आयोजन किये हैं।
आज 3 अक्टूबर को अणुव्रत प्रेरणा दिवस से व्यक्ति सुधार व अणुव्रत जीवनशैली प्रसार हेतु महत्वपूर्ण कार्यशालाओं का आयोजन हो रहा है।
4 अक्टूबर पर्यावरणशुद्धि दिवस में शुद्ध पर्यावरण के महत्व को बताने में और भावी पीढ़ियों को पर्यावरण संकट के बढ़ते खतरों से बचाने की जागरूकता हेतु और पर्यावरण सरंक्षण पर एक महत्वपूर्ण आयोजन होने जा रहे हैं।
5 अक्टूबर नशामुक्ति दिवस पर नशा नाश का द्वार करें इनकार कार्यशालाएं होने जा रही हैं।जिसमे नशामुक्ति से संकल्पबद्ध होने के लिए महत्वपूर्ण कार्यक्रम होंगे।
6 अक्टूबर अनुशासन दिवस पर “अणुव्रत अनुशासन और सफलता” विशेष रूप से सब स्थानो पर कार्यक्रम आयोजित होगें।
7 अक्टूबर को जीवन विज्ञान दिवस द्वारा नई पीढ़ी के संतुलित विकास के उद्देश्य के साथ स्कूलो, कॉलेजो में आयोजन हो रहे है। बच्चों के उज्जवल भविष्य निर्माण में सहयोगी बनने के लिए ‘‘जीवन विज्ञान से सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास’’ कार्यशालाएं का आयोजन होगा।।
इस प्रकार अणुव्रत दर्शन की सकारात्मकता का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार कर, बेहतर दुनिया निर्माण में सहभागी बनने की दिशा मे यह अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के एक सशक्त कदम है।

भगवान महावीर के प्रतिनिधि, जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने गुरुवार को नवरात्र के प्रथम दिन से आध्यात्मिक अनुष्ठान का प्रारम्भ करते हुए आर्षवाणियों का उच्चारण कर उपस्थित श्रद्धालु जनता को नौ दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान से जुड़ने की प्रेरणा प्रदान की। लगभग आधे घंटे तक उपस्थित जनता आर्षवाणियों से पूरा वातावरण गुंजायमान होता रहा।

तदुपरान्त शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित श्रद्धालु जनता को आयारो आगम के माध्यम से पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि मानव जीवन में अनेक ऐसे अवसर आते हैं, जिसमें आदमी शोकाकुल हो जाता है, दुःखी बन जाता है। प्रिय का वियोग हो जाता है तो आदमी के मन में कष्ट हो सकता है। स्वयं का अपमान हो जाए, बदनामी हो जाए, शरीर में कोई कठिनाई हो जाए तो आदमी कष्ट से प्रभावित हो सकता है। जीवन में कभी खूब आमोद-प्रमोद वाले अवसर भी आते हैं। जन्मदिवस, शादी-ब्याह आदि-आदि अनेक अवसर आते हैं, जब आदमी खूब प्रसन्न होता है। आगम में यह प्रेरणा प्रदान की गई है कि अनुकूलता में ज्यादा खुशियां नहीं मनानी चाहिए और न ही प्रतिकूलता में ज्यादा दुःखी भी नहीं बनना चाहिए।

आज से नवरात्र का आध्यात्मिक अनुष्ठान शुरु हुआ है। इस आश्विन महीने के शुक्लपक्ष में यह नवरात्र का समय आता है। लोग अपने-अपने ढंग आराधना करते हैं। जैन शासन के श्वेताम्बर तेरापंथी परंपरा में आचार्यश्री तुलसी की विद्यमानता में सबसे पहले दिल्ली में आध्यात्मिक अनुष्ठान का क्रम प्रारम्भ हुआ था, जो आज भी चल रहा है।

आदमी के जीवन में शक्ति की महत्ता होती है। शक्तिहीन आदमी मानों दयनीय के समान होता हैं। जिसमें शक्ति होती है, वह आदमी अपनी शक्ति का प्रयोग किसी को दुःख देने में नहीं, किसी का भला करने में, सेवा करने में सदुपयोग करे। मानव जीवन में शक्ति का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। जहां तक संभव हो सके, अपनी शक्ति का सदुपयोग करने का प्रयास करना चाहिए। आत्मा में शक्ति अनंत होती है। शरीर की शक्ति हो, मन की शक्ति हो अथवा चाहे वचन की शक्ति हो, चाहे जनबल हो अथवा धनबल, किसी प्रकार के बल अथवा शक्ति का दुरुपयोग नहीं करना चाहिंए। आदमी को दूसरों की सेवा में अपनी शक्ति का सदुपयोग करने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में उपालंभ मिल जाए या प्रशंसा हो जाए, उसमें आदमी को समताभाव में रहने का प्रयास करना चाहिए। शक्ति होने पर भी शांति में रहने का प्रयास करना चाहिए। अनावश्यक किसी को कष्ट देना, लड़ाई-झगड़ा आदि-आदि में शक्ति का प्रयोग न हो, बल्कि किसीकी पवित्र सेवा, निर्भिकता रहे। आदमी का चिंतन प्रशस्त होना चाहिए।

नवरात्र के समय में आदमी को शक्ति की आराधना करने का प्रयास किया जाना चाहिए। मोह की चेतना क्षीण हो। शक्ति और शांति दोनों जीवन में हो तो जीवन अच्छा हो सकता है।

 

 

 

Leave a Reply