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शौर्य सभागार में आयोजित हुआ ‘एवरेस्ट सम्मिट 2.0 – बियोंड दी माउनटेंस’ समारोह

राची, झारखण्ड  | अगस्त   19, 2024 ::

रांची के जैप 1 (शौर्य सभागार) के ऑडिटोरियम, डोरंडा में ‘एवरेस्ट सम्मिट 2.0 – बियोंड दी माउनटेंस’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के 20 पर्वतारोहियों का आगमन हुआ।

इस कार्यक्रम का आयोजन आइडिएट इंस्पायर इग्नाइट फाउंडेशन के संस्थापक निदेशक – राजीव गुप्ता के द्वारा सीसीएल,साइबरपीस कॉर्प्स ,र्प्स अडानी पावर, स्वच्छता पुकारे, और प्रतिज्ञा के सहयोग से किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित करके की गई।

जैमलिंग तेनजिंग
मुख्य वक्ता जैमलिंग तेनजिंग ने अपने अनुभव को साझा किया और बताया की कैसे वो अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए विदेश गए और कुछ ही समय बाद वापस लौट आए। बाद में अपने पिता तेनजिंग नोर्गे की तरह ही एवरेस्ट की चढ़ाई की और अभी भी अपना जीवन पहाड़ों के बीच बीता रहे हैं।

पूर्णा मलावथ
कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते हुए पूर्णा मलावथ जो विश्व की सबसे छोटी उम्र की महिला हैं एवरेस्ट फतेह करने वाली, जिन्होंने सिर्फ 13 साल और 11 महीने की उम्र में ही एवरेस्ट को जीत लिया था। पूर्णा ने अपने पर्वतारोहण की यात्रा को साझा किया और पहाड़ों पे पर्वतारोहियों को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, इन सभी चीजों की जानकारी दी।
पूर्णा ने अपने ऊपर बनी फिल्म और अपने जीवन पर लिखी किताब की भी बात की।

संगीता एस. बहल
संगीता एस. बहल ने अपने पर्वतारोहण के अनुभव साझा करने के साथ ही साथ अपने जीवन के अनुभव को भी साझा किया, जिसमे उन्होंने अपने मॉडलिंग करियर के बारे में बताया और यह भी बताया की वह मिस इंडिया,1985 की फाइनलिस्ट भी रह चुकी हैं।
संगीता ने कार्यक्रम में ही जैमलिंग तेनजिंग के हाथों अपनी एक किताब का भी उद्घाटन किया।

मीनू कालीरमन
मीनू कालीरमन ने अपने जीवन अनुभव को साझा करते हुए महिला सशक्तिकरण की बात की और अपने सपने के बारे में भी बताया की वह हमेशा से चाहती थीं की उनके परिवार को उनके नाम से जाना जाए।

ज्योति रात्रि
अपने अनुभव साझा करते हुए ज्योति रात्रि ने बताया की वे हमेशा से पहाड़ देखने के लिए इच्छुक रहती थीं और साल 2017 में मनाली ट्रेक पर गई। इसके बाद इनके जीवन में पर्वतारोहण की शुरुआत हुई और 55 साल की उम्र में एवरेस्ट पर फतेह हासिल की।

प्रकृति वार्ष्णेय
दुनिया बहुत बड़ी है और इसमें आपके रहने के अनगिनत तरीके हैं। आप जो बनना चाहते हैं वह बन सकते हैं, कोई नियम नहीं हैं। बस अपने दिल का अनुसरण करें, चाहे वह कहीं भी हो।

काम्या कार्थिकेयन
सबके अपने-अपने एवरेस्ट हैं; बस एक पैर दूसरे के सामने रखें और आप एक दिन वहां पहुंच जाएंगे।

उषा हेगड़े
अपने लक्ष्य को लगातार ऊपर उठाते हुए, एक नौसिखिया भी जीवन में महान ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

मनीषा वाघमारे
युवा छात्र अपनी दृढ़ता और धैर्य बनाए रखें क्योंकि यह सिर्फ
उनके हाथ में हैं। अपने आप पर, अपने प्रयासों पर और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखें।
सफलता अवश्य मिलेगी। दूसरों से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय प्रतिस्पर्धा पर ध्यान बनाए रखें।

सुनील नटराज
समान चुनौतियों का सामना करने वाले युवा अपने मतभेदों को खुद को परिभाषित न करने दें। उन्हें अपनाएं, समझें और अपने सपनों को साकार करने के लिए उनका उपयोग करें। अपने जुनून को निरंतर दृढ़ संकल्प के साथ पूरा करें, और ज़रूरत पड़ने पर मदद मांगने से न डरें।

तूलिका रानी
प्रतिभा के संदर्भ में अपने विशेष उपहार को पहचानें और उस पर काम करें। यदि आप किसी विशेष गतिविधि को मानसिक रूप से थके बिना घंटों तक कर सकते हैं, तो आपको इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहिए।
कड़ी मेहनत करें और लगे रहें. सफलता रातोरात नहीं मिलती. कठिनाइयों और बार-बार असफलताओं का सामना करते हुए बने रहें।
प्रकृति और स्वयं से अधिक जुड़ें।

देवराज दत्ता
अपने जुनून को आपका मार्गदर्शन करने दें। अगर आपको अपने जुनून पर भरोसा है तो आप खुद ही उसे हासिल करने का जरिया ढूंढना शुरू कर देते हैं। आप पहले से ही जानते हैं कि आपको क्या प्रयास करने हैं, आपको मदद के लिए किसके पास जाना है और आपको खुद को कितना आगे बढ़ाना है। बाकी आपकी लगन है, लक्ष्य तक पहुंचने तक हार मत मानना।

डा. मुराद लाला
चमत्कार यह नहीं है कि मैं शिखर पर पहुँच गया।
चमत्कार यह है कि मुझमें पहला कदम उठाने का साहस था

उपस्थित विशेष अतिथि:
उत्कर्ष कुमार (आईएएस, एसडीओ रांची), सुनील कुमार बरनवाल (आईएएस), यू पी शाह (बीएसएनएल निदेशक), सिद्धार्थ त्रिपाठी (आईएफएस), विनीत कुमार (संस्थापक, साइबरपीस फाउंडेशन)

 

 

 

 

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