राची, झारखण्ड | मार्च | 18, 2025 ::
साइंस एंड टेक्नोलॉजी के मौजूदा समय में जियोग्राफिक इनफार्मेशन सिस्टम (जीआईएस), ड्रोन मैपिंग तथा रिमोट सेंसिंग रोज़गार के अवसर सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थानों में बढ़ती जा रही है। इसी को ध्यान में रखकर ज़ेवियर इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल सर्विस (एक्सआईएसएस), रांची में एआईसीटीई अनुमोदित पीजीसीएम जियो-स्पेशियल टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन कोर्स चला रहा है जिसमें 30 सीट उपलब्ध है।
जीआईएस और रिमोट सेंसिंग कोर्स में लैब प्रैक्टिकल में सभी लेटेस्ट सॉफ्टवेयर जैसे आर्कजीआइएस, एरडास इमेजिन, क्यूजीआईएस, पायथन और सर्वे उपकरणों में डी.जी.पी.एस. तथा इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन के फील्ड प्रशिक्षण भी किया जाता है ताकि कोर्स करने के बाद विद्यार्थी रोजगार के उचित अवसर प्राप्त कर सकेंI इस कोर्स के माध्यम से पिछले साल के विद्यार्थियों को 70 से 80 प्रतिशत प्लेसमेंट मिल चुका हैI इस कोर्स के लिए जहाँ छात्रों की फीस 67 हजार रूपए निर्धरित है तो वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए फीस 80 हजार रूपए निर्धरित है, जिसे दो किस्तों में भरा जा सकता है।
डॉ जोसफ मारियानुस कुजूर एसजे, निदेशक, एक्सआईएसएस ने संस्थान में चल रहे इस कोर्स के विषय में कहा, “जीआईएस तथा रिमोट सेंसिंग बहुत तेज़ी से लोकप्रियता प्राप्त करने वाला विषय बन कर उभरा है, क्योंकि आज साधारण ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन से नौकरी मिलना पहले जैसा नहीं रहा है। आज शायद ही कोई सरकारी विभाग होगा जहां जीआईएस का प्रयोग नहीं हो रहा है और यही कारण है कि इस कोर्स के पश्चात जॉब की सम्भावनाएँ बहुत अधिक हैं।”
कैसे करें आवेदन:
· एआईसीटीई अनुमोदित पीजीसीएम जियो-स्पेशियल टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन कोर्स के लिये 30 सीट उपलब्ध है।
· इच्छुक विद्यार्थी 10 अप्रैल 2025 तक (https://xiss.ac.in/GITRAINING/admissionform/) पर जाकर आवेदन कर सकते है।
· कोर्स की अवधि: एक साल (दो सेमेस्टर)
· नामांकन लेने के लिए उम्मीदवार का किसी भी विषय में स्नातक के साथ 45% अंक होना आवश्यक हैI
· इस कोर्स में ई-कल्याण (छात्रवृत्ति) की सुविधा है जिससे झारखंड सरकार के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक, और पिछड़ा वर्ग के छात्र लाभ ले सकते हैI
इस कोर्स में रोजगार के अवसर:
इस कोर्स को करने के के बाद छात्रों को:
· अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, खनन एवं भूविज्ञान विभाग, नगर नियोजन एवं ग्रामीण नियोजन, कृषि विभाग, आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, खनिज अन्वेषण, वन विभाग और भूमि अभिलेख विभाग आदि क्षेत्र में सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थानों में बेहतर मौका मिलता है।
· इतना ही नहीं वर्तमान झारखण्ड सरकार ने नक्शा प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिससे जीआईएस प्रोफेशनल की मांग बढ़ती जा रही हैI इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है शहरी क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड बनाना और उन्हें अपडेट करना, ताकि भूमि स्वामित्व का सटीक और विश्वसनीय दस्तावेज़ीकरण सुनिश्चित किया जा सके। यह पहल नागरिकों को सशक्त बनाएगी, जीवन को आसान बनाएगी, शहरी नियोजन को बेहतर बनाएगी और भूमि संबंधी विवादों को कम करेगी।




