राची, झारखण्ड | अप्रैल | 18, 2025 ::
मेदांता अब्दुर रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स हॉस्पिटल, रांची के सीनियर कंसलटेंट, (गैस्ट्रो एंड लिवर ) डाॅ. संगीत सौरभ ने विश्व लिवर दिवस के मौके पर कहा कि लोगों में लिवर के प्रति जागरूकता जगाने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। लिवर पाचन तंत्र का एक प्रमुख अंग है, इसलिए इसे सुरक्षित रखने के लिए पौष्टिक और संतुलित आहार लेना चाहिए। इसके अलावा फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन का सेवन करना चाहिए तथा जंक फूड, तली हुई चीजों के साथ तम्बाकू तथा शराब के सेवन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शरीर पर मोटापा को न चढ़ने दें, कोलेस्ट्रोल को नियंत्रण में रखें और नियमित व्यायाम करें। सुबह-शाम टहलने की आदत डालनी चाहिए। अगर कोई डायबिटीज का रोगी है तो उसे इस बीमारी को नियंत्रण में रखना आवश्यक हो जाता है। अपनी जीवनशैली को नियमित रखकर लिवर की बीमारी से बचा जा सकता है। रात में सबेरे खाएं और अच्छी नींद लेने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि दुनिया में हर साल 20 लाख लोग लिवर की बीमारी से मरते हैं। खराब आहार, अत्यधिक शराब के सेवन या अत्यधिक वजन जैसी अस्वास्थ्यकारी आदतें लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है जिससे फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस, हेपेटाइटिस की बीमारी होती है। हेपेटाइटिस कई तरह की होती है। इन बीमारियों से बचने का एक मात्र तरीका है कि अपने खान-पान और दिनचर्या को सही रखना।
लिवर रोगों के प्रकार:-
फैटी लिवर: लिवर में अत्यधिक वसा जमा होना,
हेपेटाइटिस बी और सी: वायरल संक्रमण जो लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं,
एल्कोहोलिक लिवर रोग: अत्यधिक शराब के सेवन से लिवर की क्षति,
फैटी लिवर रोग: लिवर में वसा जमा होने से होने वाला रोग।
विश्वजीत कुमार, अस्पताल निदेशक, मेदांता अस्पताल रांची ने कहा, “हमारे यहां क्रोनिक लिवर रोग से लेकर सभी लिवर रोगों का सर्वोत्तम इलाज अच्छे से होता है। हम रांची के लोगों को यही कहेंगे कि संतुलित आहार लें और नियमित व्यायाम करें अपने लिवर को ठीक रखें।
डाॅ. सौरभ ने कहा कि लिवर रोगों के कारण है अत्यधिक शराब का सेवन यह लिवर को नुकसान पहुंचाता है, मोटापा लिवर रोगों के खतरे को बढ़ाता है।
लिवर रोगों के लक्षण:-
प्रारंभिक लक्षण, पीलिया होना, उल्टी होना, भूख न लगना,
उन्नत लक्षण:-पेट में पानी भरना, रक्तस्राव होना।
डाॅ. सौरभ ने कहा कि इस वर्ष के विश्व लिवर दिवस की थीम है भोजन ही औषधि है, इसलिए अपने भोजन में मौसमी फलों, पत्तेदार सब्जियों का उपयोग करें। इसके साथ ही दूध-दही, अंडा, मछली के अलावा दाल का भी नियमित सेवन करें। घर का बना खाना ज्यादा से ज्यादा खाने का प्रयास करें, बाहरी भोजन से परहेज करें। उन्होंने कहा कि शरीर पर चर्बी को न चढ़ने दें। इससे कोलेस्ट्रोल बढ़ता है जो फैटी लिवर का कारण बनता है। तम्बाकू और शराब के सेवन से भी फैटी लीवर की समस्या आती है जो काफी गंभीर होती है। उन्होंने कहा कि अपने देश में 30-32 प्रतिशत तक की जनसंख्या में फैटी लिवर पाया जाता है। फैटी लिवर का अर्थ है लिवर में अत्यधिक चर्बी का जमा होना। वजन बढ़ना, थकावट और पेट में हल्का दर्द इसके शुरुआती लक्षण माने गये हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी में इस तरह के लक्षण दिखे तो तुरंत विशेषज्ञ डाॅक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अगर समय पर इसका इलाज न कराय जाए तो यह समस्या काफी गंभीर हो सकती है।
डाॅ. सौरभ ने
निदान और उपचार के बारें में बताया
– एंडोस्कोपी : लिवर की बीमारियों के निदान के लिए उपयोग की जाने वाली एक प्रक्रिया
– फाइब्रोस्कैन : लिवर की बीमारियों के निदान के लिए उपयोग की जाने वाली एक गैर-इनवेसिव तकनीक




