राची, झारखण्ड | मई | 27, 2025 ::
मेदांता अब्दुर रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स हॉस्पिटल, रांची में सरवाइकल नेक्रोटाइज़िंग फ़ेसिटिस (सीएनएफ) से पीड़ित 75 साल की एक महिला की जान बचाई गई। विभिन्न अन्तरालों पर उसकी गर्दन का चार बार आॅपरेशन करना पड़ा। गर्दन में सूजन था जो फट गया था और उससे मवाद निकल रहा था। मरीज का बी.पी. लो था, कमजोरी इतनी थी कि उसने बिस्तर पकड़ ली थी। आॅपरेशन के बाद वह अब बिल्कुल स्वस्थ है। सरवाइकल नेक्रोटाइज़िंग फ़ेसिटिस गर्दन में होने वाली एक दुर्लभ बीमारी है जिसमें गंभीर और जानलेवा बैक्टीरियल संक्रमण होता है जो गर्दन के गहरे फेशियल तल में फैलती है। इस संक्रमण से टिश्यू और फेशिया दोनों प्रभावित होते हैं। महिला की गर्दन इस संक्रमण से सड़ चुकी थी। 15 दिन तक इस संक्रमण से पीड़ित महिला ने कई जगह अपना इलाज करवाया पर कुछ भी फायदा नहीं हुआ तब वह मेदांता हाॅस्पिटल, रांची में भर्ती हुई। इस बीमारी में मृत्यु दर काफी ज्यादा है, फिर भी महिला की जान बचा ली गयी।
आॅपरेशन करने वाले हाॅस्पिटल के ई.एन.टी. विशेषज्ञ डाॅ. कृष्ण किंकर दास ने बताया कि संक्रमण छाती की और बढ़ रहा था, लेकिन समय से आॅपरेशन हो जाने के कारण उसका बढ़ना रूक गया। मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और वह खाना भी बिल्कुल नहीं खा पाती थी। उसका टी.एल.सी. काउंट 34000 से घटकर 6000 पर आ गया था।
उन्होंने कहा कि दांत में इंफेक्शन, अनियंत्रित मधुमेह, बैक्टीरियल इंफेक्शन, चोट लगना, सर्जरी में इंफेक्शन, शरीर में पोषाहार की कमी, क्राॅनिक किडनी डिजीज, ट्यूमर इस बीमारी के कारण माने गये हैं। इस बीमारी के लक्षण के बारे में उन्होंने कहा कि गर्दन में गंभीर दर्द, त्वचा में लालिमा, सूजन और गर्मी लगना और बुखार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में पकड़ में आ जाने पर यह बीमारी ठीक हो जाती है।
मेदान्ता अस्पताल, रांची के डॉ कृष्ण किंकर दास, ईएनटी एवं हेड एंड नेक सर्जन, के साथ डॉ तपस कुमार साहू, आईसीयू के प्रभारी, और डॉ अरविंद प्रकाश, प्लास्टिक सर्जन, का मरीज के सफल उपचार में अहम भूमिका निभाई।




