राची, झारखण्ड | सितम्बर 25, 2024 ::
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद झारखंड द्वारा वर्तमान झारखंड सरकार के विफलता के लेकर बीते पंद्रह सितंबर को प्रांत स्तरीय छात्र गर्जना का आयोजन रांची में किया था साथ ही इस कार्यक्रम को झारखंड राज्य के सभी जिलों में छात्र गर्जना के साथ बदहाल झारखंड का काला दस्तावेज समाज के समक्ष रखने का कार्यक्रम का आह्वान किया था।
आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद रांची जिले द्वारा स्थानीय रांची समाहरणालय कार्यालय के समक्ष छात्र गर्जना कार्यक्रम का आयोजन किया गया कार्यक्रम में प्रवासी कार्यकर्ता के रूप में प्रदेश सह मंत्री दिशा दित्या उपस्थित रहे।
उन्होंने वर्तमान झारखंड के परिदृश्य पर अपना विचार रखते हुए कहा कि 2019 के विधानसभा चुनाव में विद्यार्थियों को शिक्षा, युवाओं को रोजगार और महिलाओं को सुरक्षा एवं समान अधिकार के वादे पर राज्य की जनता ने हेमंत सोरेन को अवसर प्रदान किया। सरकार को चुनते समय 19 वर्ष का युवा झारखंड आज 24 वर्ष पूरे करने के कगार पर खड़ा है। लेकिन अपना वयस्क राज्य झारखंड आज भी गरीबी और कमजोर प्रशासन की मार झेल रहा है।
साल में 5 लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा हो अथवा झारखंड की बेटियों को प्राथमिक विद्यालय से पीएचडी तक की मुफ्त शिक्षा का वादा, राज्य की महिलाओं को चूल्हा भत्ता देने का वादा हो अथवा राज्य के जनमानस को उत्तम स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाने का वादा, सरकार अपने हर वादे को पूरा करने में पूरी तरह से नाकाम रही है।
शिक्षा व्यवस्था किसी भी राज्य की रीढ़ की हड्डी होती है।उच्च शिक्षा में सामान्य विश्वविद्यालय, महाविद्यालय,इंजीनियरिंग कॉलेज,मेडिकल कॉलेज, एग्रीकल्चर कॉलेज आदि शामिल है इसका सशक्त होना राज्य के तरक्की के लिए महत्वपूर्ण होती है विगत 5 वर्षों में शिक्षा वेंटिलेटर पर आ चुकी है।यहां ना तो विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति है ना तो कॉलेज में नियमित प्रधानाचार्य। शिक्षक की कमी का असर गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई पर हो रही है।जिसके कारण झारखंड राज्य के विद्यार्थी बाकी राज्य की तुलना में रोजगार और जीवन मूल्यों के मापदंड में पिछड़ते जा रहे हैं।आखिर इस सब का जवाबदेह कौन है।




