राची, झारखण्ड | अप्रैल | 05, 2025 ::
संत जेवियर्स कॉलेज राँची के जियोलॉजी विभाग द्वारा “झारखण्ड के भूविज्ञान और भू-संसाधनों की प्रगति” पर सेमिनार का आयोजन किया| कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर रोबर्ट प्रदीप कुजूर,एसजे ने सभी अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम का शुरुआत किया|
कार्यक्रम में वक्ता के तौर पर उपस्थित जीएसआई झारखण्ड यूनिट के उपनिदेशक अखौरी बिश्वाप्रिया ने छोटानागपुर गनेस्सिक काम्प्लेक्स के तहत भीतर महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और भू-विरासत की दृष्टि से झारखण्ड को देखना विषय पर अपना व्याख्यान दिया| वहीँ आईआईटी(आईएसएम) धनबाद के डॉ. सहेंद्र सिंह ने नैनो भूविज्ञान की उपयोगिता को बताते हुए उत्तरी सिंहभूम के इलाके में स्वर्ण धातु विज्ञान पर अपना प्रकाश डाला| बीआईटी मेसरा के डॉ. अखौरी प्रमोद कृष्णा ने भी पारंपरिक व आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग करते हुए झारखण्ड के भू संसाधनों पर चर्चा की| आईआईटी रुड़की के डॉ. राजर्षि चक्रवर्ती ने लावा स्वर्ण भंडार से केस स्टडी के साथ स्वर्ण अन्वेषण में अयस्क-भंडार अनुसन्धान पर अपना विचार साझा किया| विभागाध्यक्ष डॉ. जयंत सिन्हा ने भी विषय पर अपना ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया कि राज्य में भूवैज्ञानिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण ही झारखण्ड को खनिज का हृदय से भी संबोधित किया जाता है| इस दौरान प्रतिभागियों ने अपना रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया और विद्यार्थियों द्वारा प्रदर्शनी भी लगायी गयी| संगोष्ठी में झारखंड की समृद्ध भूवैज्ञानिक क्षमता पर प्रकाश डाला गया तथा शोधकर्ताओं, विद्वानों और छात्रों के बीच शैक्षिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया गया।
मौके पर कॉलेज के उप-प्राचार्य डॉ. फादर अजय अरुण मिंज एसजे, डॉ. फादर एन. लकड़ा एसजे, डॉ. माबेल टोप्पो, विनोद तिर्की, डॉ. सोमेश सेन गुप्ता, डॉ. मेल्विन एक्का, व शोधार्थी सहित विभाग के छात्र उपस्थित थे|




