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स्वस्थ एवं स्वच्छ परिवार के लिए माता की भूमिका समाज में बहुत ही अहम : डा. अर्चना

राची, झारखण्ड | मई | 12, 2024 ::

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र चौधरी बगान, हरमू रोड में मदर्स डे के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित
राजयोग केन्द्र झारखंड सरकार की डा० अर्चना ने अपने विचार अभिव्यक्त करते हुए कहा कि स्वस्थ एवं स्वच्छ परिवार के लिए माता की भूमिका समाज में बहुत ही अहम है। माँ तेरी सूरत से
अलग भगवान की सूरत क्या होगी सच माँ जैसी माँ ही होती है।

इनर व्हील क्लब की प्रसीडेंट माया वर्मा ने कहा आज तक हम मात् दिवस पर शरीर को जन्म देने वाली तथा शरीर की पालना करने वाली माँ का सम्मान करते आए। लेकिन इस मानव जीवन में हमारी और भी अनेक माँ हैं। भारत माँ, प्रकृति माँ तथा परम माँ परमात्मा। जीवन में मौाँ के महत्व को समझें तथा सभी माँ का सपूत बन कर दिखायें। अब परम माँ अर्थात परमात्मा से
संबंध जोड़कर उनके असीम प्यार का अनुभव करें साथ ही राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से परम माँ से संबंध का सुंदर अनुभव करे ।

नाबार्ड बैंक के डी०जी0एम0 सुभाष चन्द्र गर्ग ने कहा माँ शब्द में जादू है एक ऐसी जादू की छड़ी जो घुमाते ही जीवन की सारी मुश्किलों को आसान कर देती है। माँ हमारे जीवन में भगवान के महत्व को समझाती है। उन्होंने सभी माताओं को नैतिक मूल्यों से सम्पन्न माँ बनने का संदेश दिया। वर्तमान समय परिवार में बढ़ रही विकृतियों को खत्म कर एकता, प्रेम व स्नेह के सूत्र में बांधने का श्रेष्ठ कार्य माता ही कर सकती है। माँ हमारी सच्ची गुरू सच्ची मार्गदर्शक, विश्वसनीय
मित्र, ईमानदार सलाहकार, मददगार साथी, सच्ची गुरू बच्चों के जीवन के बगीचे में सबसे सुगंधित गुलाब होती हैं। माँ का वर्णन शब्दों में करना असंभव है। सबसे बड़ी माँ शिव है जिन्होंने इस
दुनिया की खुबसूरत रचना की है। नारी जगजननी है परंतु आज नारी का माता रूप विलुप्त होता जा रहा है।

कार्यक्रम में हण्डई मोटर्स के मैनेजर अमरजीत जी ने कहा कि माताओं की वेहतर स्थिति बनाने के लिए हम सभी को आध्यात्मिकता की सुन्दर शीतल सुरक्षित छाया में आना होगा। मंदिर
की शोभा प्रतिमा है घर की शोभा माँ होती है। प्रतिमा बिना मंदिर सूना है माँ बिना घर सूना है।
आध्यात्मिकता से नारी सशक्त होती है। परमसत्ता से संबंध जोड़कर उजर्जावान रहना ही सच्चा सशक्तिकरण है।

ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी निर्मला बहन ने कहा मातृशक्ति के सम्मान के परिचायक के रूप में आज भी विद्या की देवी के रूप में सरस्वती, धन की देवी लक्ष्मी व शक्ति की देवी के रूप में मॉँ दुर्गा का गायन पूजन है लेकिन विडम्बना है कि इसके बावजूद लोग महिलाओं पर अत्याचार करने से नहीं चूकते। मूर्तियों की बड़ी भावना से अर्चना होती है परंतु चैतन्य रूप में नारी का उतना ही
तिरस्कार हो रहा है। समय की मॉग है नारी जागे परमात्म संबल से सम्मानजनक सिंहासन पर आसीन हो। देवयुग के गौरव से महिलाओं को पुनः विभूषित करने के लिए ब्रह्माकूमारी संस्थान इस दिशा में अनुपम कार्य कर रहा है। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज संस्थान में बड़ी संख्या में माताओं
की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में बाल कलाकारों के द्वारा सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत की गई ।

 

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