राची, झारखण्ड | मई | 11, 2024 ::
चिन्मय मिशन गीता ज्ञान यज्ञ के प्रासायंकालीन सत्र के चतुर्थ दिवस स्वामीजी ने कल की चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि योगयुक्त साधक जिसका अन्त:करण शुद्ध हो गया है जिसने अपनी इन्द्रियों और मन को नियंत्रित कर लिया है , वह सभी व्यक्तियों की आत्मा और स्वयं की आत्मा को एक जानता है वह सभी कर्म करते हुए दिखता है.
किन्तु वह अकर्ता ही है । ऐसा व्यक्ति आत्मज्ञानी ही है , उसकी सभी इन्द्रियांं अपनी क्रियाएं करती रहती हैं किन्तु तत्व ज्ञानी को यही लगता है कि ईश्वर ही उसके माध्यम से कर्म कर रहे हैं ।
किन्तु जो तत्वज्ञानी नहीं हुए हैं उन्हें कर्मयोग करना है अर्थात उसे अपने सभी कर्मों को असक्त एवं ईश्वर के प्रति अर्पित हो कर करना चाहिए ऐसा करने से वह पाप में लिप्त नहीं होगा जैसै कमल जल में रहते हुए भी जल में लिप्त नहीं है ।
हमारे पास देह है ,मन है , बुद्धि है , इन्द्रियां है , हमारे सभी कर्म इनकी शुद्धि के लिए ही हो ।
आज की आरती के यजमान थे श्याम मण्डल के सर्वश्री चन्द्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, प्रमोद बगड़िया, रमेश सारस्वत एवं राजेश सारस्वत।
कार्यक्रम का संचालन सतीश गुप्ता द्वारा विधिवत किया गया




