राची, झारखण्ड | फरवरी | 22, 2025 ::
संत जेवियर्स कॉलेज रांची के फादर सी. डिब्रावर सभागार में जेवियर इकनोमिक सोसाइटी और आई.क्यू.ए.सी के बैनर तले “1800 के बाद से ज्ञान और वैश्विक असमानता है, जो वर्तमान को प्रश्नांकित करता है” विषय पर व्याख्यान श्रृंखला 2 का आयोजन किया गया|
कार्यक्रम का शुरुआत कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. फादर एन. लकड़ा एसजे के स्वागत सम्भाष्ण और अतिथियों का स्वागत से हुआ| व्याख्यान में मुख्य वक्ता के तौर पर इंस्टिट्यूट ऑफ़ ह्यूमन डेवलपमेंट, नई दिल्ली व अर्थशास्त्री प्रो. देवनाथ उपस्थित रहे| उनका व्याख्यान 1800 के बाद से ज्ञान और वैश्विक असमानता विषय केन्द्रित था| उन्होंने 1800 से 1950 तक के ‘Great Divergence’ पर प्रकाश डाला, जिसमें यूरोपियन देशों द्वारा उन्नत तकनीकी ज्ञान पर एकाधिकार का वर्णन किया गया। उन्होंने तकनीकी प्रगति के लिए ज्ञान सृजन के महत्व पर भी जोर दिया। मौके पर उपस्थित डॉ. हरीश्वर दयाल ने भी अपने विचार साझा करते हुए बताया कि शिक्षा को उद्योग से जोड़ने पर बल दिया और ब्रिटिश अर्थशास्त्री जेम्स ए. रॉबिन्सन द्वारा रचित किताब वाई नेशन फेल्स की विवेचना की| बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. फादर फ्लोरेंस पूर्ति एसजे ने बताया कि भारत में ज्ञान की प्रचुरता है, लेकिन इसका सही उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने ज्ञान और अनुसंधान में अधिक निवेश करने की बात कही| अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष ने डॉ. मारकुस बारला ने व्याख्यान श्रृंखला के महत्ता पर बात की, जिसका उद्देश्य सशक्तिकरण, प्रेरणा देना और सकारात्मक प्रभाव लाना है। मंच का सञ्चालन प्रो. आशीष रंजन व प्रो. अंशु कुजूर ने किया| कार्यक्रम में प्रश्नोत्तरी सत्र का भी आयोजित किया गया| कार्यक्रम का समापन डॉ. धीरजमणि पाठक के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ|
मौके पर रजिस्ट्रार डॉ. फादर केनेडी सोरेंग एसजे, पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सुदामा चौबे, डॉ. शिशिर चौधरी, आईएचडी के डॉ अश्विनी कुमार, डॉ. विनय कुमार पाण्डेय, डॉ. मनोहर लाल, प्रो. बी.के. सिन्हा, डॉ. संजय सिन्हा सहित कॉलेज के अन्य प्राध्यापक व विद्यार्थीगण उपस्थित रहे|




