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भारतीय संस्कृति संपूर्ण विश्व की रक्षा करने में समर्थ : ‘पद्मश्री’ प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र

राची, झारखण्ड  | अप्रैल |  26, 2025 ::

मारवाड़ी महाविद्यालय, रांची के स्वामी विवेकानंद सभागार में “इंटर डिसीप्लिनरी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेडीशनल इंडियन विजडम : इंटीग्रेशन विद कंटेंपरेरी इश्यूज डेवलपमेंट एंड पॉलिसी मेकिंग” की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। तत्पश्चात सामूहिक रूप से राष्ट्र-गान गाया गया। कार्यक्रम में आगे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार द्वारा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ सुदेश कुमार साहू ,कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रोफेसर अभिराज राजेंद्र मिश्रा और रांची विश्वविद्यालय मानविकी संकाय के डिन डॉ अर्चना दुबे का अंग वस्त्र , स्मृति चिन्ह एवं एक-एक पौधा देकर सम्मानित किया।

उद्घाटन सत्र में आगे कार्यक्रम के अतिथियों का परिचय डॉ राहुल कुमार, सहायक प्राध्यापक, संस्कृत विभाग ने कराया तथा सम्मेलन के बारे में बताया। साथ ही उन्होंने पूरे सत्र का कुशलता से संचालन भी किया।

कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए महाविद्यालय के प्रचार डॉ मनोज कुमार ने कहा कि लगातार तीसरे वर्ष अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन के द्वारा हमारा प्रयास नूतन विचारों के प्रस्फुटन और ज्ञान-विज्ञान के विविधता के विनिमय को सहज करना है। हम सबको मिलकर एक बेहतर शोध अध्ययन एवं शिक्षण का वातावरण तैयार करना है ।

तत्पश्चात सम्मेलन में शोध सार पुस्तक का विमोचन किया गया।

कार्यक्रम में आगे विशिष्ट अतिथि और रांची विश्वविद्यालय मानविकी संकाय के डिन डॉ अर्चना दुबे ने अपनी संबोधन में कहा कि आज यहां विद्वानों के समागम से मैं अभीभूत हूं और धन्यभागी महसूस कर रही हूं। इस तरह की उत्कृष्ट विषय के साथ अनुपम आयोजन के लिए मारवाड़ी महाविद्यालय परिवार को बहुत-बहुत बधाई ! सतत, सही दिशा में परिश्रम और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता पारंपरिक भारतीय ज्ञान के केंद्र में सदैव से रहे हैं ,हम इसे अपने जीवन शैली में उतार कर एक बेहतर विश्व का निर्माण कर सकते हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उद्घाटन सत्र के की नोट स्पीकर बहू भाषाओं के विद्वान, साहित्य के अनेक सम्मानों से अलंकृत पद्मश्री प्रो डॉ अभिराज राजेंद्र मिश्रा ने कहा कि यहां आकर बेहद अपनापन की अनुभूति हो रही है। प्राचीन ऋषियों का शोध और विवेचन संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए सभी तरह से मंगलकारी है। हमारा भारतीय ज्ञान ईश्वर मुल्क है । उन्होंने श्रीमद्भगवतगीता का उल्लेख करते हुए ईश्वर प्राप्ति के चार साधन बताए ज्ञान यज्ञ वेद और अनासक्त कर्म योग।

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरागत ज्ञान समस्त संसार को रक्षा करने में समर्थ है । जरूरत है हमें इसे जानने की। नई पुणे आगे कहा की ज्ञान के चार स्तर हैं :- स्मृति बुद्धि, मति और प्रतीविज्ञान यह सिर्फ हमें हमारे पूर्वजों ऋषियों से मिला है। शेष जगत सिर्फ बुद्धिमत्ता को जानता है ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और रांची विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ सुदेश कुमार साहू ने कहा कि यहां आकर मेरा विश्वास बन रहा है कि यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित होने, इसे जानने और समझने के लिहाज से मील का पत्थर साबित होगा।

कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के प्रोफेसर इंचार्ज डॉ राजीव रंजन शर्मा ने किया।

उद्घाटन सत्र के समाप्ति उपरांत आमंत्रित अंतरराष्ट्रीय अतिथियों का अभिभाषण हुआ । अंतरराष्ट्रीय अतिथियों के वर्चुअल मोड में संबोधन के दौरान वक्ताओं और प्रतिभागियों से समन्वय का कार्य कुशलतापूर्वक महाविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक और सम्मेलन के आयोजक सचिव डॉ बसंती रेनू हेंब्रम के द्वारा किया गया। मैडम

अंतरराष्ट्रीय अतिथियों में श्रीमाली रॉय, कैलिफोर्निया, रासा आचार्य डॉ धर्मयासा ,बाली , इंडोनेशिया तथा स्नेहा हर्ष मैसाचुसेट्स, संयुक्त राज्य अमेरिका से अपने व्याख्यान दिए।

इन्होंने अपने-अपने संबोधन में भारतीय पारम्परिक ज्ञान को स्थाई कृषि विकास, सामाजिक समरसता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ-साथ सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति सहज और स्थापित पद्धति बताया।

उद्घाटन सत्र के पश्चात दो सत्रों में पत्र वाचन किया गया। प्रथम सत्र में 17 तथा द्वितीय सत्र में 19 पत्रों का वाचन किया गया। उद्घाटन सत्र के अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक गण, प्रतिभागीगण, शिक्षाकेतर कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।

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