राची, झारखण्ड | मई | 25, 2025 ::
संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की संस्कृति राष्ट्रीय उपस्थिति अनुदान योजना के अंतर्गत आज दिनांक 25 मई 2025 को अपराहन 12:30 से शौर्य सभागार में एकदिवसीय जनजातीय एवं लोक कला उत्सव की आयोजन किया गया है । इस कार्यक्रममें मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित धर्मेंद्र दीक्षित पूर्व निदेशक संस्कृति सह संयुक्त सचिव ,पर्यटन, कला संस्कृति , खेलकूद युवा कार्य विभाग ,पद्मश्री मधुमनसुरी हंसमुख, पूर्व प्रशासनिक पदाधिकारी श्री जटाशंकर चौधरी भारतीय लोक कल्याण संस्थान के संस्थापक चंद्रदेव सिंह एवं सचिव कुणाल कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर और नगाड़ा बजाकर इस एक दिवसीय जनजातीय एवं लोक नृत्य उत्सव का उद्घाटन किया।
बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित श्री दीक्षित ने अपने संबोधन में कहें की झारखंड की कला संस्कृति वट वृक्ष है यह कभी नहीं सूख सकती है ।यहां की जनजातीय लोक नृत्य और संस्कृति काफी धनी है जो हमें प्रकृति से जुड़े रहने का संदेश देती है यहां बारह मास के गीत है और संगीत है प्राकृतिक सौंदर्य से भरा या झारखंड सचमुच सभी प्रांत से अलग है और यहां के विभिन्न जनजातीय लोकगीत और लोक नृत्य में सचमुच अद्भुत चमत्कार है और इसलिए भी हम अन्य राज्यों की अपेक्षा काफी खुशहाल है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख ने अपने संदेश में कहा की झारखंड की कला संस्कृति के संवर्धन और विकास के लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा । और भारतीय लोक कल्याण संस्थान युवा कलाकारों को मंच देने का काम कर रहा है जो काफी सराहनीय है 20 वर्षों से लगातार झारखंड की कला संस्कृति और कलाकारों के लिए मंच प्रदान करता हुआ यह संस्था और आगे बढ़े।
विशिष्ट अतिथि पूर्व प्रशासनिक अधिकारी श्री जटाशंकर चौधरी ने अपने संबोधन में कहें की इस तरह के कला संस्कृति कार्यक्रमों का आयोजन से हमारी सभ्यता संस्कृति बचेगी और आज जो हमारे युवा पीढ़ी आधुनिकता के दौड़ में अपनी सभ्यता संस्कृति से दूर हो जा रहे हैं उसे बचाने का यह एक सराहनीय प्रयास है।
आज के इस एकदिवसीय जनजातीय एवं लोक नृत्य उत्सव में राज्य के नाम चिन्ह जनजातीय एवं लोक कला दल ने झारखंड के जनजातीय एवं लोक नृत्य के मनमोहक प्रस्तुति दी।प्रस्तुत होने वाले जनजातीय नृत्य में मुंडारी नृत्य,उरांव नृत्य, संथाली नृत्य, खरवार नृत्य, वहीं लोक नृत्य में छौ नृत्य, पाइका, नागपुरी नृत्य, एवं पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र की बालिकाओं द्वारा प्रस्तुति की जाएगी।




