राची, झारखण्ड | मार्च | 02, 2025 ::
भारत और थाईलैंड के कला , संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को सहेजने वाले देश हैं। दोनों देशों के बीच कई समानताएं हैं। भारत मेरे दूसरे घर की तरह है। पारंपरिक चिकित्सा एवं आधुनिक चिकित्सा पद्धति के बीच एकीकरण जैसे विषय पर आयोजित यह कॉन्फ्रेंस वर्तमान समय की मांग है क्योंकि फार्मास्यूटिकल साइंस काफी तेज गति से नए लक्ष्यों की ओर अग्रसर है। उक्त बातें वलीलॉक यूनिवर्सिटी ( वर्ल्ड यूनियन फॉर हर्बल ड्रग डिस्कवरी ) थाईलैंड की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ० वीरानूट निशापॅटर्न ने कही। वे झारखंड राय विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रही थी। इंटीग्रेशन ऑफ़ ट्रडिशनल मेडिसिन और मॉडर्न हेल्थ केयर सिस्टम विषय पर आयोजत यह कॉन्फ्रेंस एक अच्छा अवसर है दोनों देशों की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को जानने एवं साथ मिलकर काम करने का दोनों ही देश अपनी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को संजोये हुए आगे बढ़ रहे हैं।
झारखण्ड राय विश्वविद्यालय रांची में रविवार को आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस “इंटीग्रेशन ऑफ़ ट्रेडीसनल मेडिसिन ऑन मॉडर्न हेल्थ केयर सिस्टम” का उद्घाटन पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्वलित कर किया गया। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल स्टडीज (एन आई एफ एस ) श्री लंका में सीनियर रिसर्च प्रोफेसर डॉ० ललित जयसिंघे , आईसीएमआर में वैज्ञानिक प्रो० देबप्रसाद चटोपाध्याय, एनआईपीइआर कोलकाता में एसोसिएट प्रोफेसर और एचओडी डॉ ० सतीश कुमार नंजापन्न , बीआईटी मेसरा के फार्मेसी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ ० मानिक घोष एवं झारखण्ड राय विश्वविद्यालय रांची के कुलसचिव प्रो० पीयूष रंजन ने सामूहिक रूप से दीपप्रज्जवलित किया।
स्वागत संबोधन करते हुए झारखण्ड राय विश्वविद्यालय रांची की कुलपति प्रो० (डॉ०) सविता सेंगर ने कहा की हमारे वेदों में, भारतीय ज्ञान परंपरा में इतना कुछ लिखा हुआ है उसे हम क्यों नहीं आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में शामिल करते हैं ?
प्रो० सेंगर ने कॉन्फ्रेंस में शोध पत्र प्रस्तुत करने पहुंचे शोधार्थी एवं विद्यार्थियों से कहा की जिन भी विषयों पर आप अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने आये हैं उसके वैज्ञानिक तथ्यों की पहले खोज करे।




