राची, झारखण्ड | नवम्बर | 30, 2024 ::
मारवाड़ी महाविधालय, रांची में 30 नवंबर एवं 1 दिसंबर 2024 को आयोजित होने वाले दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन राँची विश्वविद्यालय, रांची के माननीय कुलपति डॉ० अजीत कुमार सिन्हा के कर कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ। इस संगोष्ठी में देश-विदेश के लगभग 100 वैज्ञानिक, शिक्षक एवं शोधार्थी अपना शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे तथा विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
मुख्य वक्ता के रूप में कुलपति डॉ. अजीत कुमार सिन्हा ने संगोष्ठी के थीम पर प्रकाश डाला। अपने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से उन्होंने विस्तार से बताया कि सतत् विकास के लिए किन-किन आधुनिक तकनीकियों का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही साथ इसकी भी विस्तृत विवेचना की, कि हमारी ‘नीति’ क्या होनी चाहिए और ‘किस’ कार्यप्रणाली को अपनाकर हम सतत् विकास की ओर अग्रसर हो सकते हैं। विशिष्ट अतिथि राँची विवि के साइंस डीन ने कहा कि इस प्रकार का आयोजन, विचारो के आदान प्रदान के लिए आवश्यक है।
इसके पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्जवलन के साथ प्रारम्भ हुआ जिसे संयुक्त रूप से कुलपति डॉ अजीत कुमार सिन्हा, राँची वि०वि० के साइंस डीन डॉ० अरुण कुमार एवं मारवाड़ी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ० मनोज कुमार ने सम्पन्न किया। इसके पश्चात् संगोष्ठी से संबंधित पुस्तिका (अब्स्ट्रैक बुक) का विमोचन किया गया। आज के कार्यक्रम में ही महाविद्यालय की इलेक्ट्रॉनिक पत्रिका ‘आयाम’ का विमोचन भी किया गया।
अपने संबोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ मनोज कुमार ने सभी आगन्तुक अतिथियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने हेतु महाविद्यालय सदैव नए-नए प्रयोग करता रहेगा।
आमंत्रित वक्ता के रूप में सोलन केटरिंग इंस्टिट्यूट, न्यूयॉर्क (यूएसए) के वैज्ञानकी डॉ बी एन प्रशांत ने नैनोफॉर्मुलेशन के संबंध में अपना व्याख्यान दिया। रोचेस्टर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, यूएसए के भौतिक वैज्ञानिक रीतू बनर्जी ने नेट बायोमास के संबंध में अपना व्याख्यान देते हुए बताया कि इसका उपयोग फ्यूल के रूप के किया जा सकता है। रसिया एकेडमी ऑफ साइंस, मास्को के रसायन वैज्ञानिक क्रिस्टीन वी अलेक्स्यान ने बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर मैटेरियल्स कि मुख्य फाइंडिंग के संबंध में अपना विस्तृत व्याख्यान दिया। एस आ रम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एवम टेक्नोलॉजी, तमिलनाडु के वैज्ञानिक सैमुअल जैकब ने भारत में एग्रो इंडस्ट्रियल वाटर मे बेहतर उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। डायरेक्ट्रोट ऑफ फ्लोरिकल्चरल रिसर्च, पुणे के वैज्ञानिक एस पी जीवन कुमार ने सील क्वालिटी एवं आर्नेमेंटल क्रॉप्स के बारे में अपना व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम में तकनीकि सत्रों के अध्यक्षगण प्रोफेसर (डॉ) अशोक कुमार चौधरी, डॉ० सतीश चन्द्र गुप्ता एवं डॉ० पी० के० प्रधान भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर इंचार्ज डॉ राजीव रंजन शर्मा ने किया।
संगोष्ठी के प्रथम दिन तीन तकनीकि सत्र आयोजित हुए।
1) बायोलॉजिकल एवम केमिकल साइंसेस कैटेगरी के तकनीकि सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर (डॉ)अशोक कुमार चौधरी ने की। इनके साथ डॉ० सृष्टी कुमारी, डॉ सलोनी स्वरूपा एवं श्री शीतल उराँव सहयोगी में रहे। इस सत्र में 15 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
2) फिजिकल, केमिकल एंड कंप्यूटेशनल कैटेगरी के तकनीकि सत्र की अध्यक्षता डॉ. सतीश चन्द्र गुप्ता ने की। डॉ० घनश्याम प्रसाद, डॉ० राजू मांझी एवं डॉ० कुणाल गुप्ता ने इनका सहयोग किया। इस सत्र में कुल शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
3) तीसरे तकनीकी सत्र से अध्यक्षता डॉ० पी० के० प्रधान ने की। इनका सहयोग श्री शिवनन्दन राम, अनुभूति श्रीवास्तव एवं मुकेश शर्मा ने किया। इस सत्र ने कुल शोध पत्र प्रस्तुत किया।
संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ० राजीव चन्द्र रजक एवं भौतिकी शिक्षक श्री संतोष रजवार मे सभी विशिष्ठ वक्ताओं एवं तकनीकि सत्र अध्यक्षों का विस्तृत परिचय कराया।




