राची, झारखण्ड | दिसम्बर | 23, 2022 :: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र चौधरी बगान हरमू रोड में राष्ट्रीय
किसान दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 23 दिसम्बर को यह दिवस मनाया
जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य है किसानों का सम्मान करना। इस दिन किसानों की भूमिका
और अर्थव्यवस्था में उनके योगदान के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए देश भर में जागरूकता अभियान
चलाया जाता है। कृषि हमारी सबसे बुद्धिमान खोज है क्योंकि यह अंत में वास्तविक धन, अच्छी नैतिकता और
खुशी में सबसे अधिक योगदान देती है। किसानों के कल्याण के लिए केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा अनेक योजनाएं
चलायी जा रही है। जिसका लाभ किसानों को मिल है और उनकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
ब्रह्माकुमारीज संस्थान द्वारा किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
आगे उन्होंने कहा कि परमात्मा ने अपनी विशेष रचना “मनुष्य के लिए अन्न के उत्पादन की जिम्मेवारी
किसान, कृषक, खेतिहर, अन्नदत्ता आदि नामों से पुकारे जाने वाले मनुष्यों को दे रखी है। विश्व में पेशो मे
खेती करना सबसे पुराना मूल पेशा या कुदरती पेशा हैं। परनात्मा रूपी किसान हर 5000 साल पर आकर ऐसा
सतयुगी खेत तैयार कर जाता है जिसमें 84 पीढ़ी तक मनुष्य रूपी फसल पैदा होती रहती है हालांकि पीढ़ी दर
पीढ़ी गिरावट आती जाती है। जिस प्रकार एक माता शिशु को जन्म देकर उसकी सेवा तब तक दिन-रात करती
है जब तक कि वह शिशु चलना बोलना नहीं सीख लेता, उसी प्रकार एक किसान खेत में बीज बो कर उसकी
सेवा तब तक दिन रात करता है जब तक कि फसल पक कर कट नहीं जाती। माता संतान के लिए सब कुछ
सहन करती है और किसान भी अपनी फसल के लिए सर्दी गर्मी सब कुछ सहन करता है। माता को अपनी
संतान का विछोह दुःख देता है तो किसान को अपनी फसल का पक कर बिक जाना उससे विछोह होना सुख
देता है। वह तो जीवन पर्यन्त हर फसल के बाद बीज बचाता रहता है और बेफिक्र रहता है कि खेत व बीज मेरे
पास है समय पर भगवान जल दे ही देता है। फिर चिंता किस बात की। परंतु अब सब कुछ इतना आसान नहीं
रहा। जिस प्रकार बार-बार बीज बचाने से बीज की गुणवता कम होती जाती है जैसे बार-बार दही का जामन
बचाते रहने से दही खट्टा हो जाता है। उसी प्रकार बार-बार पुर्नजन्म लेते लेते मनुष्या आत्मा के गुण कम होत
जाते हैं और उसका जीवन खटटा होता जाता है। आज आदि मौलिक गुण तो सभी मनुष्यात्माओं के लुप्त हो गये
हैं परंतु सर्वाधिक खटास किसान के जीवन में आई है। एक खुशहाल किसान ही उत्तम फसल उगा सकता है।
किसान भाईयों को अपने जीवन में बदलाव लाने की आवश्यकता है। इसके लिए राजयोग का अभ्यास बहुत ही
लाभदायक है।



