विकसित भारत के योगदान में लड़कियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण।
गुड़िया झा।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का
मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को उन्हें अपने अधिकार के प्रति जागरूक करने और आगे बढ़ने के साथ समाज में उच्च स्थान प्राप्त कर अपना जीवन यापन करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
अक्सर हमारे देश में “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ” की बड़ी-बड़ी बातें तो बहुत होती हैं लेकिन अभी भी बहुत सी जगहों पर इस तरफ ध्यान नहीं दिया जाता है। थोड़ा सा ध्यान अगर इस ओर भी दिया जाये, तो वास्तव में कभी भी और कहीं भी बालिकाओं को रूढ़िवादी विचारधाओं के जंजीरों में नहीं फंसना होगा। शहरों में अभी भी पूरी तरह से इसका विकास नहीं हो पाया है। इसके सबसे प्रमुख कारणों में एक कारण लैंगिक भेदभाव भी है। इसका समाधान मात्र कहने से ही नहीं, बल्कि स्वयं की शुरूआत करने से ही संभव है।
1, भ्रूण हत्या पर रोक।
विकसित भारत के योगदान में सबसे पहली पाबंदी भ्रूण हत्या पर होनी चाहिए। अभी भी कई जगहों पर लड़के और लड़कियों में भेदभाव कायम है। लिंग परीक्षण पर रोक लगाकर और भेदभाव को मिटाकर बालिकाओं के विकास पर जोर दिया जा सकता है।
एक ओर जहां नवरात्रि में कन्या पूजन की परंपरा है और दूसरी ओर लिंग परीक्षण का कार्य चल रहा हो, तो ऐसे में सिर्फ यह कहा जा सकता है कि बालिकाओं का महत्व त्योहारों तक ही सीमित होकर रह गया है।
शिक्षा के वास्तविक रूप को धरातल पर लागू करना हमारी शिक्षा की महत्ता को दर्शाता है। कन्या पूजन की परंपरा भी तभी सार्थक होगी जब भ्रूण हत्या पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सकेगी।
2, परवरिश में समानता।
आज महिलाएं हर क्षेत्र मे हैं और देश का नाम रौशन कर रही हैं। लेकिन समाज का एक वर्ग ऐसा भी है जहां बेटे और बेटियों की परवरिश में अभी भी भेदभाव के विचार को नकारा नहीं जा सकता है। एक छोटी सी सोच कि बेटा बुढापे का सहारा बनेगा और बेटी पराया धन है, ने महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया है।
जब परवरिश में समानता होगी तभी विकास के रास्ते भी अपने आप ही बनेंगे। एक बेटी जब सभी रिश्तों को निभाते हुए आगे बढ़ती है, तो सहज ही वह एक बहुत बड़ी सम्मानित छवि के रूप में उभरती है। ऐसे में हमारी मानवता और संवेदनाएं उन्हें आगे बढ़ने के लिए और भी ज्यादा प्रोत्साहित करती हैं।
3, सुरक्षा का अधिकार।
ये वो अधिकार है जिसका पालन हम सबको मिलकर करना होगा। अभी भी बेटियों को बाहर निकलने पर प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। बेटियों को पढ़ाई के साथ आत्मरक्षा के गुण भी सिखाने होंगे। उन्हें निडर और आत्मविश्वास से परिपूर्ण करना होगा कि हम हर हाल में उनके साथ हैं।


