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दिल्ली के द्वारका सेक्टर 10 में जलाया गया 211 फ़ीट का रावण

 

बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा देश भर में हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। दशहरा लंका के राजा रावण के भगवन श्री राम द्वारा अंत किए जाने का प्रतीक है।

इस दिन देश की भिन्न भिन्न भागो में रावण के पुतले जलाये जाते है। इस दिन रावण के साथ उसके पुत्र मेघनाथ एवं भाई कुम्भकरण के पतले भी जलाये जाते है। दिल्ली के द्वारका सेक्टर १० में इस साल अब तक का सबसे बड़ा २११ फ़ीट का रावण का पुतला बनाया एवं जलाया गया। ये विश्व का अब तक का सबसे बड़ा रावण का पुतला है। इसको तैयार करने में ४० कारीगर लगे रहे, जिन्हे अम्बाला से बुलाया गया था। 4 महीने से ऊपर का समय इस विशाल रावण के पुतले को बनाने में लगा। जिसको देखने के लिए इतनी भीड़ उमड़ी की वहां पैर भर रखने की जगह तक नहीं थी।

देश के हर भाग में दशहरा मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल में इसको विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि श्री राम ने 9 दिन तक माँ दुर्गा की उपासना की एवं १०वे दिन रावण पर विजय प्राप्त की इसलिए इस दिन को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है। भक्त लोग दशमी पर माँ दुर्गा की विदाई पर उनसे प्राथना करके उनकी विदाई एवं विसर्जन करते हैं।

दशहरे पर रावण, उसके पुत्र मेघनाथ एवं भाई कुम्भकरण के विशाल पुतले आतिशबाजी के साथ जलाए जाते हैं, जो प्रकाश द्वारा अंधेरे को खत्म करने का प्रतीक है। दिवाली दशहरा के बीस दिन बाद मनाई जाती है। दिवाली भगवान श्री राम द्वारा राक्षस रावण को मारने के बाद भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की अयोध्या वापसी का प्रतीक है।

 

 

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