राची, झारखण्ड | मई | 12, 2025 ::
बुध पूर्णिमा के अवसर पर विचार गोष्ठी रांची विश्वविद्यालय रांची के उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो डॉ रिजवान अली के आवासीय पुस्तकालय में आयोजित हुई जिसकी अध्यक्षता राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर धनबाद के संस्थापक प्राचार्य डॉ वासुदेव प्रसाद ने किया। विचार गोष्ठी में एडवोकेट अफरोज अलम, गिरिडीह कॉलेज गिरिडीह के शिक्षाविद् डॉ गुलाम समदानी, राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय कांके रांची के शिक्षक डॉ ओम प्रकाश ने अपने विचार रखे। विचार गोष्ठी में मानवता की पूजा के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। इस अवसर पर कबीर, रहीम, रसखान, रामचरित मानस आदि के संदर्भ में बुद्ध की करुणा, दया, अहिंसा, प्रेम, आत्म दीपो भाव को जोड़ते हुए प्रो रिजवान ने कहा कि सत्य मार्ग पर चलना ही मोक्ष की प्राप्ति है। उन्होंने इस विचार गोष्ठी में स्वामी विवेकानंद के उस संबोधन को बतलाया जहां से वे भारतवर्ष का देदीप्यमान दर्शन को कहा है। उन्होंने कहा कि बुद्ध के विचारों में मानव की पूजा नहीं बल्कि मानवता की पूजा होती है। डॉ ओम प्रकाश ने कहा कि तपना और सहना और कुछ नहीं कहना सिर्फ चलते रहना साथ ही निष्काम कर्म करते रहना ही बुद्धम शरणम् गच्छामि है। डॉ गुलाम समदानी ने जायसी का जिक्र करते हुए कहा कि अंधकार से दूर रहने के लिये उपकर करते रहना होगा। डॉ वासुदेव प्रसाद ने कहा कि जो दूसरों के उपकार के लिए जीता है वहीं जीवित है। शांति पाठ के साथ विचार गोष्ठी सम्पन्न हुआ।




