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पीआईएस का 13वां वार्षिकोत्सव संपन्न

राची, झारखण्ड  | दिसम्बर |  29, 2024 ::

पाम इंटरनेशनल स्कूल रांची का 13वां वार्षिकोत्सव कडरू स्थित हज हाउस के सभागार में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष शमशेर आलम उपस्थित रहे एवं विशिष्ट अतिथि के तौर पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष ज्योति सिंह माथारू, मार्केटिंग बोर्ड झारखंड के अध्यक्ष रविंद्र सिंह, युवा आयोग झारखंड के अध्यक्ष कुमार गौरव एवं झारखंड प्रदेश के विनय दीपू उपस्थित रहे। सांस्कृतिक, शैक्षणिक रचनात्मक एवं सामाजिक संदेश से भरे वार्षिक उत्सव में विद्यालय के बच्चों ने अपनी कला से लोगों की सराहना बटोरी। प्री नर्सरी से पांचवी कक्षा के छात्र-छात्राओं ने अपनी कला के प्रदर्शन से लोगों को बड़े सपने और ऊंची सोच रखने की ओर प्रेरित किया। कक्षा छठवीं से लेकर दसवीं के छात्र-छात्राओं ने वर्तमान समय में मोबाइल की ज्यादा इस्तेमाल से होने वाले नुकसान और जीवन में घट रही दुर्घटनाओं से अवगत कराया वहीं छात्राओं ने लड़कियों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए ताइक्वांडो मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लेने की ओर एवं स्वयं को मजबूती से समाज में अपनी उपस्थिति दर्ज करने की ओर प्रेरित किया। कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावक एवं छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि शमशेर आलम ने कहा कि पाम इंटरनेशनल स्कूल में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। शहर में ऐसे बहुत कम शिक्षण संस्थाएं हैं जहां बच्चों में आचरण वर्तमान तकनीकी शिक्षा एवं प्रतिभा को तराशा जाता है। श्रेष्ठ अतिथि केशव महतो कमलेश ने विद्यालय की शिक्षा नीति की सराहना की। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती लुबना फातिमा ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद, रचनात्मक कार्य एवं आत्मरक्षा की कला को भी अपने जीवन में शामिल करना बेहतर होगा। विद्यालय की अकादमिक हेड डॉक्टर साएका आलम ने शिक्षा के महत्व को परिभाषित करते हुए कहा कि शिक्षा मानव जीवन का एक अंग है जिसे हम चाह कर भी अपने आप से अलग नहीं कर सकते हैं। एक बच्चे के लिए सबसे पहले शिक्षक उनके माता-पिता होते हैं। विद्यालय के संस्थापक एवं अध्यक्ष मोहम्मद आलम ने अपने संबोधन में लोगों को यह संदेश दिया कि वर्तमान शिक्षा के अंदर वह शक्ति नहीं है जो नई पीढ़ी के बच्चों को अपनी दूसरी और तीसरी पीढ़ी के साथ संबंध में संतुलन स्थापित कर सके।

 

 

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