रांची, झारखण्ड | जून | 28, 2021 :: सृजन संसार की ओर से ऑनलाइन मासिक गोष्ठी में कवियों ने मौसम और प्रकृति की कविताएं पढ़ी।
रांची- सृजन संसार की ओर से गूगल मीट के माध्यम से ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी डॉक्टर सुरिंदर कौर ‘नीलम’ की अध्यक्षता तथा मंच के संरक्षक सुनील सिंह ‘बादल’ की उपस्थिति में आयोजित की गई। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय महिला काव्य मंच की राष्ट्रीय महासचिव सारिका भूषण, नेहाल हुसैन सरैयावी , वार्ड पार्षद अरुण झा एवं डॉ सुनीता यादव थीं। कार्यक्रम का संयोजन सृजन संसार के अध्यक्ष सदानंद सिंह यादव एवं मंच संचालन गीता चौबे ‘गूंज’ ने की। कार्यक्रम की शुरुआत रंजना वर्मा ‘उन्मुक्त’ द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना- हे शारदे मां ,हे शारदे मां से हुआ। तत्पश्चात विभा वर्मा ‘वाची’ ने -तुम मेरे कौन हो सब कुछ प्रिये। डॉ सुरिंदर कौर ‘नीलम’ ने – भींगे-भींगे अहसास
तेरे लिए रखे खास । सारिका भूषण ने दो क्षणिकाएं- वर्किंग लेडी एवं जीवन रेखाएं की प्रस्तुति दी। रूना रश्मि ‘दीप्त’ ने-है कितना अनमोल नीर ये, मिलकर इनको आज बचाएँ। कामेश्वर सिंह ‘कामेश’ ने – उनकी याद में अश्क बहाके देख लिए, जाने अनजाने प्यार बढ़ाके देख लिए, ग़ज़ल तरन्नुम में पढ़कर कार्यक्रम में वाहवाही लूटी तो नेहाल हुसैन ‘ सरैयावी’ ने- अपनी बिगड़ी हुई तक़दीर संवर जाने दो,
जो गुज़रती है मेरे दिल पे गुज़र जाने दो। । रंजना वर्मा ‘उन्मुक्त’ ने- साथ हमारा लगता प्यारा,ईश्वर का वरदान । डॉ रजनी शर्मा ‘चंदा’ ने- शिकायत में तुम हो दुआओं में तुम हो
खुदा की कसम हर इबादत में तुम हो। सीमा सिन्हा ‘मैत्री’ ने – मेरी मौन मोहब्बत आपको समझाया न गया प्यार का जो खत लिखा था मैंने आप को पढ़ाया ना गया।
सुनील सिंह ‘बादल’ ने – सर पर दो बम गिरा गया कोई! तो सूरज श्रीवास्तव ने अपनी ग़ज़ल की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को गति प्रदान की। डॉ सुनीता यादव ने पारंपरिक लोकगीत अम्मा मेरे बाबा को भेजो रे कि सावन आयो रे तो चंद्रिका ठाकुर ‘देशदीप’ ने-चांद मुंह ढाँपकर रात सोया बहुत!तब दीया एक माटी का रोया बहुत!!दानेश्वर सिंह ने- वक्त एक सा नहीं रहता साहब वक्त बदलता जरूर है । डॉ आकांक्षा चौधरी ने- चांद के रथ पर वो आएगा एक दिन;मीनू मीना सिन्हा ने- वक्त ना कभी रुकता है वक्त ना कभी झुकता है की प्रस्तुति दी। राजश्री राज ने अपनी कविता उसकी प्रिया
मेरा चिंतन मन।
डॉ सुषमा केरकेट्टा ने एक ग़ज़ल तथा औरत पर केंद्रित एक कविता प्रस्तुत की सुधा कर्ण ने कविता क्या है..मन के भाव…. । गीता चौबे “गूंज” ने – तेरी-मेरी, मेरी-तेरी जब से आँखें चार हुईं दिल में अरमानों की बारिश मूसलाधार हुई। खुशबू बरनवाल ‘सीपी’ ने पापा तो दूर रहते हैं लेकिन करीब रहते हैं की प्रस्तुति दी।ऋतुराज वर्षा ने – मां तेरी जुदाई का गम सह न पायेंगे । कल्याणी झा ‘कनक’ ने – सारे शिकवे गिले अब भुला दीजिए
खुशनुमा रात है फिर मिला कीजिए ।। पुष्पा पांडे ने- एक बार आये हो त्रेता में …., मुनमुन ढाली ने -कमाल धमाल इश्क़, रामनरेश यादव ने-पड़ने लगी है सावन की फुहार आओ सखी झूला लगा ले तो सदानंद सिंह यादव ने-ओ आषाढ़ की रिमझिम बारिश!क्या संदेशा लाई हो की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए अंत में धन्यवाद ज्ञापन गीता चौबे गूंज ने किया।




