रांची: गठिया रोग विशेषज्ञ (रुमेटोलॉजिस्ट) डॉ विंध्याचल कुमार गुप्ता ने कहा है कि झारखंड में आज भी बड़ी संख्या में लोग गठिया रोग (आर्थराइटिस) और उससे जुड़ी बीमारियों के बारे में सही जानकारी नहीं रखते। यही कारण है कि अधिकांश मरीज समय पर सही विशेषज्ञ तक नहीं पहुंच पाते, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जोड़ों में दर्द, सूजन, सुबह उठने पर अकड़न या बार-बार जोड़ों की समस्या हो, तो इसे सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत गठिया रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। डॉ गुप्ता सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि गठिया रोग के बारे में अधिक से अधिक जागरूकता फैलाना जरूरी है, ताकि आम लोगों को यह जानकारी मिल सके कि इस बीमारी के इलाज के लिए अलग से प्रशिक्षित विशेषज्ञ यानी रुमेटोलॉजिस्ट उपलब्ध हैं। समय पर सही इलाज मिलने से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं और गंभीर जटिलताओं से बच सकते हैं।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2020 में नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल से रुमेटोलॉजिस्ट में सुपर स्पेशियलिटी प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने रांची में अपनी सेवाएं शुरू कीं। उन्होंने प्रवेश परीक्षा में पूरे भारत में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। गठिया रोग में सुपर स्पेशलिटी प्रशिक्षण पूरा करने के उपरांत, उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की डीएनबी परीक्षा में ऑल इंडिया लेवल पर प्रथम स्थान हासिल किया। देशभर में सर्वोच्च शैक्षणिक रिकॉर्ड और विशेषज्ञता प्राप्त करने के बाद, उन्होंने स्थानीय मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से रांची में अपनी सेवाएं शुरू करने का निर्णय लिया है।
डॉ गुप्ता ने कहा कि रांची आने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि लोगों में गठिया रोग को लेकर जागरूकता का अभाव है। इसके बाद उन्होंने विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों और जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना शुरू किया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में हजारों मरीजों का इलाज करने के दौरान यह अनुभव हुआ कि यदि गठिया रोग की समय रहते पहचान हो जाए और मरीज रुमेटोलॉजिस्ट से इलाज कराए, तो बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन देर से जांच और गलत इलाज के कारण जोड़ों को स्थायी नुकसान, दवाओं की बढ़ती जरूरत और अन्य गंभीर जटिलताएं सामने आती हैं।



