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झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में सामूहिक प्रयास जरूरी : डॉ.इरफान अंसारी 

राची, झारखण्ड  | जून |  03, 2025 ::

रांची। झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर सामूहिक प्रयास जरूरी है। निजी क्षेत्र के अस्पतालों को सरकार के साथ सहयोग करते हुए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने में सतत प्रयासरत रहने की जरूरत है। उक्त बातें स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने मंगलवार को होटल रैडिशन ब्लू में एसोसिएशन ऑफ हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (एएचपीआई) की झारखंड शाखा के सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि कही। डॉ.अंसारी ने कहा कि झारखंड में रिम्स 2 की स्थापना यथाशीघ्र की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक बेहतर बनाने और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाएगी। निजी क्षेत्र के अस्पताल संचालकों व प्रबंधकों से उन्होंने अनुरोध किया कि मृत मरीज के परिजनों से शव को अस्पताल से रिलीज करने में मानवता को तवज्जो दें। यदि किसी अस्पताल का काफी अधिक बिल हो जाता है तो वैसी स्थिति में अस्पताल प्रबंधक उनसे संपर्क करें। सरकार समाधान का कोई रास्ता अवश्य निकालेगी। उन्होंने आगे कहा कि डॉक्टर होने के नाते हम स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन का सुझाव अच्छा है। हम इस पर काम करेंगे। अस्पताल में बेडों की संख्या बढ़ाएंगे। स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो अस्पताल बेहतर कार्य करेगा, उसे बढ़ावा देने के साथ उस अस्पताल को सम्मानित करेंगे। उन्होंने कहा कि हम मंत्री बने हैं तो कुछ बेहतर करने के लिए। संथाल परगना में आज भी मेडिकल का अभाव है। हम सबको मिलकर हेल्थ सेक्टर को मजबूत करना है। झारखंड में 1200 स्वास्थ उप केंद्र खोलने की सरकार की योजना है। प्राइवेट सेक्टर के सभी अस्पताल के मान सम्मान को झुकने नहीं देंगे। मंत्री ने बोकारो के प्रीति अस्पताल और जैन अस्पताल को अनियमितता की शिकायत पर आयुष्मान से बाहर करने की बात कही।

वहीं, एनआरएचएम के डायरेक्टर अबू इमरान ने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों के सहयोग से झारखंड हेल्थ सेक्टर में बेहतर कार्य कर रहा है। झारखंड आयुष्मान में भी बेहतर कर रहा है। बीमा योजना का लाभ दिया जा रहा है। अस्पतालों में बेडों की संख्या बढ़ाई जा रही है। उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में झारखंड सरकार की उपलब्धियां गिनाई।

वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि एसोसिएशन को बधाई देता हूं कि सरकार और प्राइवेट अस्पताल को एक साथ जोड़ने का काम किया है। हम मानते हैं कि राज्य में अस्पताल और डॉक्टर की कमी है। स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर की कमी है। लेकिन यह कमी जल्द ही दूर होगी। उन्होंने कहा कि सरकार नर्सिंग सेक्टर को बढ़ावा देना चाहती है। झारखंड सरकार चाहती है कि आयुष्मान का भुगतान समय पर हो। जो प्राइवेट अस्पताल जमीन के बाध्यता को लेकर काम नहीं कर पा रहे हैं, सरकार जमीन उपलब्ध कराने में हर संभव सहयोग करेगी।

कॉन्क्लेव में संगठन के अध्यक्ष सईद अहमद अंसारी ने कहा कि हम सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं। प्राइवेट अस्पतालों की जो परेशानी है, सरकार उसे समझे और उसका हल करे।

वहीं, एसोसिएशन के संरक्षक जोगेश गंभीर ने संगठन की ओर से आठ सूत्री मांगों से संबंधित ज्ञापन के संदर्भ में स्वास्थ्य मंत्री से सकारात्मक पहल करने का अनुरोध किया। उन्होंने मंत्री से कहा कि आयुष्मान का पेमेंट प्राइवेट अस्पतालों को समय से मिले। रेगुलर मीटिंग में प्राइवेट अस्पतालों को भी बुलाया जाए। सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया जाए। मरीजों का इलाज के क्रम में मृत्यु हो जाने पर काफी राशि बकाया रह जाती है। इस संबंध में भी सरकार की ओर से सहयोग की अपेक्षा है। उन्होंने कहा कि यह एसोसिएशन सरकार और प्राइवेट अस्पतालों के बीच एक ब्रिज का काम करता है।

संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गिरधर ज्ञानी ने कहा कि यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज को झारखंड में कैसे लाएं, इस दिशा में भी प्रयास जरूरी है। झारखंड सरकार अस्पतालों में बेडों को बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही हर जिला में एक मेडिकल खोलने की जरूरत है। सरकार प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा दे।

इस अवसर पर झारखंड के सभी जिलों से प्रमुख निजी अस्पतालों के संचालक व एसोसिएशन के सदस्यगण काफी संख्या में मौजूद थे।

कॉन्क्लेव में एएचपीआई के संरक्षक व जाने-माने सर्जन डॉ.अनंत सिन्हा, आइएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ.अजय कुमार सिंह, डॉ.मजीद आलम, आइएमए के सचिव डॉ.प्रदीप कुमार सिंह, डॉ.शंभू सिंह, डॉ.आबिद, सिद्धांत जैन, हजारीबाग से हर्ष अजमेरा, देवघर से डॉ.सतीश ठाकुर, रामगढ़ से दीपक जैन, डाल्टेनगंज से मनीष, गिरिडीह से डॉ.आजाद, डॉ.रुद्रा सहित शहर के कई चिकित्सक मौजूद

थे।

 

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