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ब्रह्म की प्राप्ति, भ्रम की समाप्ति : निरंकारी मिशन

राची, झारखण्ड  | सितम्बर   15, 2024 ::

रांची संत निरंकारी सत्संग भवन बुद्ध विहार अरगोड़ा में रविवार सत्संग में डाल्टेनगंज से आई परिचारिका बहन तारा ने गुरु के संदेश को सांझा करते हुए फरमाया कि प्रभु परमात्मा की प्राप्ति पूर्ण सत्गुरु से ही हो सकती है। जब हमें ब्रह्म की प्राप्ति हो जाती है तो हर तरह के भ्रम अपने आप खत्म हो जाते है। ब्रह्मज्ञान हमें हमारे कर्मों के चलते नहीं मिला, बल्कि गुरु ने हमारे पर तरस खाकर हम पर कृपा की है। ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के बाद हमारा जीवन एक रोशन मिनार की तरह होना चाहिए। रोशन मिनार बनने के लिए किसी पदवी की जरूरत नहीं होती बल्कि हमें अपने जीवन में सुधार लाकर गुरु मर्यादा के मुताबिक अपने जीवन को ढालना होता है। ब्रह्म के प्रचार के लिए किसी विशेष साधना की जरूरत नहीं होती, बल्कि हमारा कर्म ऐसा होना चाहिए कि लोग हमें ब्रह्मज्ञानी समझें। उन्होंने कहा कि आज निरंकारी सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज दुनिया के कोने-कोने पर जाकर ब्रह्म ज्ञान बांट रहे हैं। हर इंसान को प्यार, प्रीत, नर्मता, सरलता और भाईचारे से मिलकर रहने का संदेश दे रहे है और यह समझा रहे है कि तन, मन और धन सब प्रभु की देन है और इसे प्रभु का मान कर ही हमें भक्ति करनी है।उन्होंने बताया कि संत निरंकारी मिशन इस मान्यता में विश्वास रखता है कि निराकार परब्रह्मा जहां सृष्टि के कण-कण में व्याप्त है।वहीं यह संपूर्ण दृश्य मान जगत से भी न्यारा है। संपूर्ण दृश्य महान सृष्टि माया है जो परिवर्तन शील है। इस पंच भौतिक सृष्टि के परिवर्तित होने तक भी जो अस्तित्व सदैव स्थाई स्थिर और एकरस है वहीं निराकार परब्रह्मा है। वास्तव में निराकार परमात्मा को जानना ही मानव जीवन का मूल्य उद्देश्य है।

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