राची, झारखण्ड | अप्रैल | 16, 2025 ::
भगवान महावीर मेडिका सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, जो मणिपाल हॉस्पिटल्स नेटवर्क का हिस्सा है, ने उन्नत न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। अस्पताल ने सिर्फ तीन सप्ताह के भीतर छह जटिल ब्रेन ट्यूमर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर उन्नत चिकित्सा देखभाल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा आज डॉ. विक्रम सिंह और डॉ. अमित कुमार (सीनियर कंसल्टेंट्स- न्यूरोसर्जरी विभाग), डॉ. सतीश शर्मा (कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजी) और डॉ. विजय कुमार मिश्रा (मेडिकल डायरेक्टर) की उपस्थिति में की गई। यह उपलब्धि अस्पताल की क्लिनिकल दक्षता को दर्शाती है और पूर्वी भारत में उन्नत न्यूरोसर्जरी के एक अग्रणी केंद्र के रूप में इसकी प्रतिष्ठा को और मजबूत करती है।
न्यूरोसर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विक्रम सिंह के नेतृत्व में की गई ये सर्जरीज़ अस्पताल की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं-जहां संवेदनशीलता, सटीकता और बेहतर परिणामों पर केंद्रित इलाज को प्राथमिकता दी जाती है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों। इलाज पाने वाले मरीजों में 6 वर्षीय बालक से लेकर वरिष्ठ नागरिक तक शामिल थे। इनमें से कई मरीज आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से थे, जिन्हें या तो छूट दी गई या सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत इलाज प्रदान किया गया।
इनमें एक मामला रांची की 58 वर्षीय गृहिणी का था, जिन्हें अचेत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। उनके मस्तिष्क में एक बड़ा ट्यूमर था, जो अत्यधिक दबाव उत्पन्न कर रहा था। स्थिति गंभीर थी और ऑपरेशन करीब 10 घंटे चला। ऑपरेशन के बाद उन्हें कुछ दिन वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। धीरे-धीरे उन्होंने होश में आना शुरू किया और 12वें दिन अस्पताल से पूरी तरह सचेत अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया, बस थोड़ी सी याददाश्त की समस्या शेष रही। उनकी बेटी, जो विदेश में डॉक्टर हैं, इलाज के दौरान लगातार अपनी मां के साथ संपर्क में बनी रहीं।
एक अन्य मामला गया की 30 वर्षीय युवती का था, जो चलने में परेशानी और एक कान से सुनाई न देने की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचीं। जांच में पता चला कि उनके मस्तिष्क के एक अत्यंत संवेदनशील हिस्से- ब्रेनस्टेम-के पास ट्यूमर था, जो कई महत्वपूर्ण शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करता है। इस क्षेत्र में सर्जरी अत्यधिक जोखिम भरी होती है, लेकिन माइक्रोस्कोप और एंडोस्कोप जैसे उन्नत उपकरणों की सहायता से जो रांची के कुछ ही अस्पतालों में उपलब्ध हैं-मेडिका की टीम ने सुरक्षित रूप से ट्यूमर को हटा दिया। उन्हें किसी प्रकार की गंभीर जटिलता नहीं हुई और वे दोबारा आत्मविश्वास के साथ चलने लगीं। आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से होने के कारण मेडिका ने उनके इलाज की लागत में सहायता प्रदान की।
पेडियाट्रिक न्यूरोसर्जरी में भी चुनौतीपूर्ण स्थिति सामने आई, जब पश्चिम बंगाल के पुरुलिया से आए 6 वर्षीय बालक को मस्तिष्क के पिछले हिस्से में ट्यूमर की समस्या के साथ अस्पताल लाया गया। बच्चों में इस प्रकार की स्थितियाँ जानलेवा हो सकती हैं और तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है। बच्चों की ब्रेन सर्जरी अत्यंत संवेदनशील होती है, क्योंकि उनका शरीर छोटा और रक्त की मात्रा सीमित होती है। मेडिका में यह सर्जरी सफलतापूर्वक की गई और ट्यूमर कैंसरमुक्त पाया गया। बालक ने तेजी से स्वस्थ होकर केवल चार दिनों में अस्पताल से छुट्टी पाई और आज एक सामान्य, खुशहाल जीवन जी रहा है।
एक और उल्लेखनीय मामला रामगढ़ के 14 वर्षीय किशोर का था, जो मस्तिष्क के बाएं हिस्से में बड़े ट्यूमर के कारण शरीर के दाहिने भाग में लकवा (पैरालिसिस) के साथ भर्ती हुए थे। परिवार के पास इलाज का खर्च उठाने की क्षमता नहीं थी, इसलिए मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना के अंतर्गत उनके इलाज की व्यवस्था की गई। सर्जरी के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपने अंगों को हिलाना शुरू किया और अब स्वयं चलने में सक्षम हैं। उनका स्वास्थ्य निरंतर बेहतर हो रहा है, जिससे परिवार में उम्मीद और खुशी लौटी है।
इन मामलों के अतिरिक्त, दो और उच्च जोखिम वाली ब्रेन ट्यूमर सर्जरी भी इसी अवधि में सफलतापूर्वक की गई, जो मेडिका की टीम की विशेषज्ञता और अस्पताल में उपलब्ध अत्याधुनिक सुविधाओं का प्रमाण हैं।




