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पेसा कानून 1996″ और “जेपीआरए 2001” के मुद्दों पर संगोष्ठी

राची, झारखण्ड  | जनवरी |  03, 2025 ::

समाज विकास केंद्र में “पेसा कानून 1996” और “जेपीआरए 2001” के मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों, इतिहासकारों, कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, जिन्होंने झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों के अधिकारों और कानूनों पर गहन चर्चा की।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं:
मरंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा को श्रद्धांजलि: कार्यक्रम की शुरुआत में मरंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा को उनके 122वें जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इतिहासकार डॉ. जोसेफ बाड़ा ने उनके योगदान और आदिवासी संघर्षों के इतिहास पर प्रकाश डाला, विशेषकर संविधान सभा में उनके द्वारा उठाए गए आदिवासी मुद्दों की चर्चा की।

पेसा कानून और जेपीआरए 2001 की पृष्ठभूमि: कानूनी विशेषज्ञ डॉ. राम चंद्र उरांव ने पेसा कानून 1996 और जेपीआरए 2001 के प्रावधानों की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने बताया कि पेसा कानून विशेष रूप से अनुसूचित क्षेत्रों के लिए बनाया गया है, जबकि जेपीआरए 2001 सामान्य क्षेत्रों के लिए है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विशेष कानूनों के होते हुए सामान्य कानूनों को लागू नहीं किया जा सकता।

पेसा, जेपीआरए 2001 और पी-पेसा के मुद्दे: सामाजिक कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग ने पेसा और पी-पेसा के बीच के अंतर को स्पष्ट किया और जेपीआरए 2001 को असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में संबंधित मामलों और उनके निर्णयों पर भी प्रकाश डाला। पूर्व IFS अधिकारी और याचिकाकर्ता श्री रोबर्ट मिंज ने पेसा नियमावली लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता श्री लक्ष्मीनारायण मुंडा ने सरकार पर आदिवासी समुदाय को विभाजित करने के प्रयासों का आरोप लगाया। श्री विक्टर मालतो ने भी इस सत्र में अपने विचार प्रस्तुत किए और स्वशासन की लंबी लड़ाई के लिए आदिवासी समुदायों को एकजुट होने का आह्वान किया।

पारंपरिक अगुआ और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दृष्टिकोण: पारंपरिक नेता श्रीमती कलावती खड़िया और श्रीमती दुर्गावती ओड़ेया ने आदिवासी समाज में पारंपरिक व्यवस्थाओं की प्रासंगिकता और उनके संरक्षण पर जोर दिया। सामाजिक कार्यकर्ता सुषमा बिरुली ने आदिवासियों को एकजुट होने का आह्वान किया, जबकि रेजन गुड़िया ने सरकार की लैंड बैंक योजना और गैर-आदिवासियों द्वारा आदिवासी क्षेत्रों पर कब्जे के मुद्दे पर प्रकाश डाला।

संकल्प: कार्यक्रम के अंत में, सभी प्रतिभागियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून 1996 को पूर्ण रूप से लागू करने के लिए एकजुट होकर प्रयास करेंगे। साथ ही, जेपीआरए 2001 के प्रावधानों का विरोध करते हुए, पेसा कानून के समर्थन में विभिन्न समूहों के साथ मिलकर आंदोलन करने का संकल्प लिया गया।

 

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