रांची, 12 नवंबर 2022ः बाल दिवस कार्यक्रम और बाल अधिकार सप्ताह के शुरूआत के मौके पर जो 14-20 नवंबर को मनाया जा रहा है के अवसर पर यूनिसेफ ने विधानसभाध्यक्ष श्री रबींद्र नाथ महतो के साथ बाल पत्रकारों का एक संवाद तथा विधानसभा लर्निंग विजिट कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के तहत रांची जिले के 7 प्रखंडों के 20 यूनिसेफ बाल पत्रकारों ने माननीय अध्यक्ष से मुलाकात की और राज्य में बच्चों के जीवन को प्रभावित करने वाले विभिन्न मुद्दों पर उनसे बातचीत की।. इस अवसर पर यूनिसेफ झारखंड की संचार विशेषज्ञ आस्था अलंग तथा नवभारत जागृति केंद्र के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
यूनिसेफ के बाल पत्रकारों को संबोधित करते हुए माननीय अध्यक्ष ने कहा, ‘‘बचपन एक ऐसी चीज है जिसे हर हाल में सुरक्षित बनाया जा सकता है और बनाया जाना भी चाहिए। बच्चों को जीने, विकास करने, सुरक्षित रहने और उनका जीवन कैसे बेहतर हो, इस पर अपनी बात रखने का अधिकार है। बाल अधिकार मानवाधिकार संस्कृति की स्थापना की मजबूत आधारशिला है, जो कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। यह बच्चों के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बच्चों के साथ आमतौर पर दुर्व्यवहार, हिंसा आदि की अधिक संभावना होती है।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘यदि बच्चों को मनोसामाजिक विकास के लिए एक सहायक वातावरण दिया जाए और उनके अधिकारों की रक्षा की जाए, तो उनमें समुचित रूप से शारीरिक एवं मानसिक विकास तथा आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान की भावना के विकास की संभावना अधिक होती है। राज्य सरकार बच्चों की समस्याओं एवं चुनौतियों के बारे में जागरूक है और इन मुद्दों के समाधान के लिए सभी कदम उठा रही है। लेकिन अकेले सरकार के प्रयासों से ही इन समस्याओं का हल नहीं निकाला जा सकता। हम सभी को एकजुट होकर राज्य में बच्चों की समस्याओं को हल करने के लिए एक साथ काम करने की आवश्यकता है। मुझे विश्वास है कि सभी के प्रयासों से हम बच्चों को राज्य में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण तथा सुरक्षित वातावरण प्रदान कर सकते हैं।’’
यूनिसेफ झारखंड की संचार विशेषज्ञ आस्था अलंग ने कहा, “बाल पत्रकारों के लिए, बाल अधिकार सप्ताह की शुरूआत के अवसर पर माननीय विधानसभा अध्यक्ष से मिलने तथा बच्चों के जीवन को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर बातचीत करने का यह वास्तव में एक अनोखा अवसर है। बच्चों को यह मंच प्रदान करने के लिए हम माननीय विधानसभा अध्यक्ष के आभारी हैं। इस तरह का कार्यक्रम बाल पत्रकारों को बाल अधिकारों के लिए और अधिक काम करने तथा उनके आत्मविश्वास और प्रेरणा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। बाल अधिकार सप्ताह बच्चों एवं युवाओं को उनके अधिकारों को लेकर आवाज उठाने तथा नीति निर्माण की प्रक्रिया में भाग लेने का एक अवसर प्रदान करता है। ये बच्चे अपने समुदायों में बाल अधिकारों के मुद्दों पर काम कर रहे हैं। बाल अधिकारों के मुखर पैरोकारों के रूप में, इन बाल पत्रकारों ने अनगिनत बाल विवाहों को रोका है तथा बच्चों को बाल मजदूरी से निकालकर उन्हें स्कूल में दाखिला दिलाने में मदद की है। ये बच्चे बाल अधिकारों के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करके राज्य में बच्चों के जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
बातचीत के दौरान, तीन बाल पत्रकारों ने माननीय विधानसभा अध्यक्ष के साथ अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं। गर्वमेंट स्कूल इटकी की सातवीं कक्षा की छात्रा अनामिका कुमारी ने बताया कि कैसे उसने अपने एक दोस्त कोे बाल विवाह से बचाया। इसी प्रकार, अनगड़़ा की छात्रा तृषा कुमारी और ओरमांझी की छात्रा लक्ष्मी कुमारी ने भी अपनी सफलता की कहानी बताई कि कैसे उन दोनों ने बच्चों को बाल मजदूरी से बचाया और उनका स्कूल में दाखिला कराया।
इस बाल अधिकार सप्ताह के मौके पर यूनिसेफ अपने साझीदारों एवं सहयोगियों का आह्वान करता है कि वे बच्चों के लिए समानता तथा समावेश के सकारात्मक संदेश का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें।




