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अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह

 

नई दिल्ली |  अक्टूबर   | 15, 2020 ::

अणुव्रत की बात नीति निर्मातोओं के साथ

अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी  द्वारा उद्घोषित अणुव्रत विश्व भारती द्वारा निर्देशित अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह को अणुव्रत समिति दिल्ली ने पुरे उत्साह से विभिन्न संस्थाओं की सार्थक सहभागिता से प्रभावशाली आयोजन किया।।

अहिंसा दिवस पर विशेष आयोजन इन्द्रप्रस्थ साहित्य भारती के मंच से हुआ जिसमे अणुव्रत समिति दिल्ली के अध्यक्षडॉ.पी.सी.  जैन ने “शिक्षा: एक चिन्तन” विषयक विचार रखते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति मे नीति निर्माता इस प्रकार से व्यवस्थाओं को अंजाम दे ताकि वर्तमान में बढती हिंसा पर लगाम लगे और शिक्षा जगत अहिंसा की रोशनी से जगमगा उठे।

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के प्रथम दिन

सांप्रदायिक सौहार्द दिवस पर इन्द्रप्रस्थ साहित्य भारती के मंच से इस क्रम में अणुव्रत समिति दिल्ली की मन्त्री डॉ.कुसुम लुनिया ने “साहित्य से सौहार्द “विषयक विचार रखते हुए कहा कि

“दीन धर्म के नाम पर कौम न हो बदनाम

आओ पुजा के लिए ढुढें नया साहित्य धाम “ लेखक की समाज के प्रति जबाबदेही होती है अत: उसकी लेखनी से ऐसी तरगें उठे जो साहित्य द्वारा सांमजस्य ,सदभावना,व सांप्रदायिक सौहार्द की लहर पैदा करदे।इसके साथ ही अणुव्रत आचार संहिता को प्रस्तुत करते हुए साहित्यकारों से अपनाने की अपील भी की।

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