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संप्रेषण अपने को व्यक्त करने एवं दूसरे को समझने की कला है: डॉ अंजेश कुमार

राची, झारखण्ड  | मई |  02, 2025 ::

राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज इन एजुकेशन रांची झारखंड में विशेष व्याख्यान आर्ट ऑफ कम्युनिकेशन स्किल विषय पर दो सत्रों में आयोजित किया गया। व्याख्यान की अध्यक्षता सेंट्रल यूनिवर्सिटी कोरापुट उड़ीसा के अतिथि प्राध्यापक सह पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग रांची विश्वविद्यालय रांची ने किया। व्याख्यान का संचालन प्रशिक्षु शिक्षक चंद्रशेखर ने किया एवं व्याख्यान के संयोजक डॉ ओम प्रकाश ने आगत अतिथियों का परिचय कराया एवं छात्र संसद के उप प्रधानमंत्री प्रशिक्षु शिक्षक विशाल महतो, युवराज, आशीष, राम उरांव ने सभी अतिथियों को सॉल से सम्मानित किया।प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान के मुख्य तकनीकी पदाधिकारी डॉ अंजेश कुमार ने अपने व्याख्यान में संप्रेषण कौशल की तकनीकी जानकारियों को बतलाया साथ ही कहा कि संप्रेषण अपने को व्यक्त करने एवं दूसरे को समझने की कला है। यह उस समय प्रभावशाली होता है, जब आप जिस बात को अभिव्यक्त करना चाहते हैं वह ठीक उसी ढंग से दूसरे तक पहुंच सके। जब कोई व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को स्पष्ट और सटीक रूप से व्यक्त करता है तथा दूसरे को समझाने में सफल होता है प्रभावी संप्रेषण कहलाता है व्याख्यान में विशिष्ट अतिथि में राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर धनबाद के संस्थापक प्राचार्य डॉ वासुदेव प्रसाद, कैम्ब्रियन पब्लिक स्कूल कांके की प्राचार्या डॉ प्रेम लता, शिक्षाविद् गोविंद पाठक, शशी पाठक उपस्थित रहे। प्रो (डॉ) जंग बहादुर पाण्डेय ने अपने व्याख्यान में आदर्श शिक्षक की कसौटी के बारे में बतलाया। उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों को बतलाया कि शिक्षक विद्यार्थियों में शुभ संस्कार, विचार को संपोषित करना, वर्धन करना साथ ही अशुभ विचार संस्कार का नाश करने का संप्रेषण करने का संकल्पक है। प्राचार्या डॉ प्रेम लता ने कहा कि आर्ट ऑफ कम्युनिकेशन स्किल का सबसे महत्वपूर्ण भाग हमे सर्वोत्तम श्रोता बनाता है। गोविंद पाठक ने सभी प्रशिक्षुओं को आशीर्वचन दिया। व्याख्यान में सत्र 2024 26 के सभी प्रशिक्षु शिक्षक सहित महाविद्यालय के शिक्षक भागीरथ आर्य, दुलाल चन्द्र महतो उपस्थित रहे।

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