राची, झारखण्ड | अक्टूबर 05, 2024 ::
मेदांता अब्दुर रज्जाक मेमोरियल वीवर्स हाॅस्पिटल, रांची में पिछले छह माह से नाक से खून बहने, नाक में रूकावट और नाक से सांस लेने में कठिनाई से परेशान झारखण्ड के एक 34 वर्षीय युवक को बिना चीरा लगाये एंडोस्कोपी सर्जरी कर राहत दिलाई गई। उसके दायीं नाक की कैविटी में एक दांत पैदा हो गया था जिसके ऊपर एक मास (द्रव्यमान) था जिससे लगातार खून बह रहा थ। इस बीमारी को मेडिकल भाषा में इंट्रोनेजल एक्टोपिक डेंटिशन कहा जाता है जो एक दुर्लभ (रेयर) बीमारी होती है। मरीज अब बिल्कुल ठीक है।
यह जानकारी देते हुए हाॅस्पिटल के कान, नाक और गला (इ.एन.टी.) विभाग के विशेषज्ञ डाॅ. कृष्णा किंकर दास ने बताया कि छह महीने से परेशान युवक ने कई हाॅस्पिटलों में इलाज कराया, पर कहीं राहत नहीं मिली। इसके बाद वह मेदांता पहुंचा जहां सीटी स्कैन तथा एंडोस्कोपी जांच में दायीं नाक की गुहा के तल पर दानेदार उत्तक से घिरा एक सफेद मास पाया गया। नैदानिक प्रस्तुति राइनोलिथ थी। अतिरिक्त दांत सामान्य दांतों की संख्या के अलावा होता हैं। उन्होंने कहा कि जांच में दांत नहीं पाया गया, पर जब हमने एंडोस्कोपी आॅपरेशन के दौरान मास को हटाया तो उसके नीचे कोई ठोस चीज लग रहा था, तो काफी मेहनत करने पर वह दांत निकला। डाॅक्टर बताते हैं कि मास तो टुकड़े-टुकड़े में निकला, पर दांत साबुत मिल गया। मास की जांच में कुछ नहीं पाया गया। डाॅ. दास ने बताया कि आॅपरेशन के बाद नाक को पैक कर दिया गया, लेकिन जब दूसरे दिन उसे खोला गया तो युवक पूरी तरह फिट था। इसके बाद उसे हाॅस्पिटल से छुट्टी दे दी गयी।
हाॅस्पिटल के डायरेक्टर श्री विश्वजीत कुमार ने बताया कि हमारे हाॅस्पिटल में हर विभाग के डाॅक्टर काफी अनुभवी हैं जिसके कारण दुर्लभ से दुर्लभ बीमारी का इलाज सुगमता से करते हैं। उन्होंने कहा कि हरेक विभाग में विशेषज्ञ डाॅक्टर तथा आधुनिक विश्वस्तरीय मशीन और तकनीकें उपलब्ध हैं जिसके कारण वे बीमारी का इलाज ढूंढ लेते हैं।




