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लोगों की नहीं अपने दिल की सुनें : गुड़िया झा

लोगों की नहीं अपने दिल की सुनें : गुड़िया झा

“कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना”।
अक्सर हम अपने जीवन में बहुत
से ऐसे मुकाम पर भी पहुंचते हैं जहां हमें कुछ निर्णय लेने में परेशानी होती है।मन में एक अजीब सा संशय बना रहता है कि पता नहीं लोग क्या कहेंगे?
जब लोगों के दिये गये सर्टिफिकेट पर हम अपनी जिंदगी को मापते हैं, तो कई बार हमें यह एहसास भी होता है कि हमने बहुत कुछ खोया भी है।हर बार हर समय लोगों की प्रतिक्रिया के कारण परेशान होने से अच्छा है कि अपने मन को शांत रख कर जिसमें अपना, परिवार और समाज का भला हो कुछ ऐसे कार्य करें। छोटी-छोटी बातों को दिल से लगाने से अच्छा है कि उन्हें नजरअंदाज कर अपने कार्यों पर ध्यान दें। अपने विचारों में प्रगति लाने के लिए हमें कुछ सजगता बरतनी होगी।

1,प्रतिक्रिया देने से बचें।
कई बार गलत ना होते हुए भी हम दोषारोपण के शिकार हो जाते हैं। अपनी बातों को कहने का अधिकार सभी के पास है। इसलिए जहां लगे कि अपनी बातों को कहनी चाहिए वहां पूरी तरह से सभ्य और स्पष्ट तरीके से अपनी बातें कहें। जिससे दूसरों को भी बुरा ना लगे और रिश्ते की मर्यादा भी बनी रहे। फिर भी ऐसा लगे कि कहीं ना कहीं आपकी बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है, तो ऐसी स्थिति में आक्रोशित होने से अच्छा है कि खुद ही उस माहौल से थोड़ी दूरी बना लें। इससे शांति बनी रहेगी और आगे के रास्ते भी बनेंगे। वाद-विवाद से जितना हो सके खुद को दूर रखें। क्रोध में लिया गया कोई भी फैसला सही नहीं होता है। ना यहां कुछ गलत है और ना वहां कुछ गलत। क्योंकि हम लोग समय और परिस्थिति के अनुसार व्यवहार करते हैं। इसलिए खुद भी किसी के ऊपर दोषारोपण करने से बचें और दूसरों के हालात को समझते हुए निर्णय लें।

2, स्वयं को हमेशा खुश रखें।
अक्सर हम दूसरों की खुशियों के लिए परेशान रहते हैं। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि बेहतर तरीके से स्वयं की खुशियों के बारे में भी सोचें। खुद को खुश रखने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि जो भी साधन उपलब्ध है उसमें व्यस्त रहें और खुद को आगे बढ़ाने के लिए अग्रसर रहें साथ ही इस काम के लिए दूसरों की मदद भी लें। हमेशा अच्छा सोचें कि सब ठीक हो जायेगा। मनोवैज्ञानिकों का भी कहना है कि जैसा हम सोचते हैं वैसा ही प्रभाव हमारे जीवन पर भी पड़ता है।

3, सकारात्मक लोगों के साथ रहें।
हमेशा सकारात्मक सोच बनाये रखें और ऐसे ही लोगों की संगति में भी रहें। अपनी खुशी को बढ़ाने का यह एक सबसे अच्छा तरीका है। अपने लिए भी समय निकालें क्योंकि हमेशा काम के बोझ के कारण दबे रहने से ज्यादा दबाव पड़ता है। खाली समय में अपनी पसंद के कार्य करें। इससे मन को बहुत ऊर्जा मिलती है और हम अगले दिन फिर से काम करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार भी होते हैं। हमेशा कुछ नया सीखने और करने के लिए आगे बढ़ते रहें। लोगों से खुले दिल से मिलें। इससे हमारा सामाजिक दायरा भी बड़ा होता है जो हमारी प्रगति के साथ-साथ हमारी खुशियों को भी आगे बढ़ाता है।

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