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दिल्ली को पावन बना शांतिदूत महाश्रमण ने किया हरियाणा में मंगल प्रवेश

दिल्ली को पावन बना शांतिदूत महाश्रमण ने किया हरियाणा में मंगल प्रवेश

*-मुण्डका से लगभग 14 कि.मी. का विहार कर बहादुरगढ़ में पधारे आचार्यश्री

*-हर्षित हरियाणावासियों ने अपने आराध्य का किया भावभीना अभिनंदन

*-हितकर और श्रेयस्कर का जीवन में करें अनुकरण: आचार्यश्री महाश्रमण

* 30.03.2022, बहादुरगढ़, झज्जर (हरियाणा):
9 नवम्बर 2014 को देश की राजधानी दिल्ली के लालकिले से मानव कल्याण के लिए अहिंसा यात्रा लेकर निकले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने नित नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश-विदेश की धरती को पावन बनाते हुए पुनः दिल्ली पधारे और दिल्ली के ही तालकटोरा स्टेडियम में ऐतिहासिक यात्रा की सम्पन्नता की घोषणा की। देश की राजधानी को अपने सुपावन चरणों से ज्योतित कर आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना संग बुधवार को हरियाणा राज्य की सीमा में मंगल प्रवेश किया। अपने आराध्य के आगमन से हरियाणावासी श्रद्धालु भावविभोर बने हुए थे।

बुधवार को प्रातः आचार्यश्री महाश्रमणजी ने दिल्ली के मुण्डका से प्रस्थान किया। दिल्लीवासी अपने आराध्य के प्रति कृतज्ञता अर्पित करने पूज्य सन्निधि में पहुंचे हुए थे तो वहीं, हरियाणावासी अपने आराध्य के स्वागतार्थ पहुंच रहे थे। समय के साथ बढ़ती जा रही सूर्य की तीव्रता के बावजूद भी आचार्यश्री निरंतर गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। विहार के दौरान आचार्यश्री ने दिल्ली की सीमा को पाकर हरियाणा की सीमा में पधारे तो बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य का अभिनंदन किया। लगभग चौदह किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री हरियाणा राज्य के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ स्थित श्री पन्नालाल बैद परिवार के निवास स्थान महाश्रमण सदनम् में पधारे। परिवार के सदस्यों ने आचार्यश्री का भावभीना अभिनंदन किया।

प्रवास स्थल के पास ही स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल प्रांगण में बने प्रवचन पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आदमी सुनकर कल्याण और पाप को जान लेता है। जानने के बाद जो श्रेय है, हितकर है, उसका अनुपालन करने का प्रयास करना चाहिए और जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। दुनिया में मनुष्यों के साथ अनेक अनेक पंचेन्द्रिय प्राणी हैं, जिनके पास कान हैं। आदमी कान से सुनकर ज्ञान प्राप्त करता है। कान ज्ञान प्राप्ति का एक सशक्त माध्यम है। आदमी अच्छे ज्ञान के साथ-साथ बुराई को भी जानता है। बुराई को जानना भी बुराई से बचने के लिए होता है। सुनकर बुराई को जानने के बाद बुराई को छोड़ने का प्रयास करना चाहिए और अच्छे चीजों को अनुकरण और अनुपालन करने का प्रयास करना चाहिए। आदमी साधु-संतों के पास जाए, उनका प्रवचन श्रवण करे तो हो सकता है, उनसे कुछ ऐसा ज्ञान प्राप्त हो सकता है, कि आदमी के जीवन का कल्याण हो जाए।

आचार्यश्री ने बहादुरगढ़ आगमन के संदर्भ में कहा कि आज हमारा बहादुरगढ़ में आना हो गया। यहां के लोगों में खूब शांति रहे, अच्छी भावना बनी रहे। बहादुरगढ़ सभा के अध्यक्ष श्री पवन जैन, मंत्री श्री संजय दूगड़, श्री पन्नालाल बैद, श्रीमती इन्दू दूगड़ ने अपनी-अपनी हर्षाभिव्यक्ति दी। स्थानीय ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी प्रस्तुति दी। बहादुरगढ़ तेरापंथ महिला मण्डल की सदस्याओं ने गीत का संगान किया।

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